लोहाघाट (चंपावत)। दीप्ति भट्ट आज सैन्य अधिकारी है लेकिन उनका सफर कतई आसान नहीं रहा। बेहद विपरीत हालात के बावजूद अपने संघर्ष और मां की प्रेरणा उनकी कामयाबी का आधार बनी। तीन साल की उम्र में दीप्ति के सिर से पिता गिरीश चंद्र भट्ट का साया उठ गया। मां हेमंती भट्ट ने शुरू में पिथौरागढ़ में जनता स्टोर चलाकर बच्चों की परवरिश की। 1989 में लोहाघाट जीजीआईसी में शिक्षिका बनीं हेमंती भट्ट ने बच्चों के लिए मां और गुरु दोनों जिम्मेदारियों का निर्वहन किया। दीप्ति की प्रारंभिक शिक्षा शिशु मंदिर लोहाघाट, जीजीआईसी लोहाघाट, राजकीय पॉलिटेक्निक से आईटी के बाद देहरादून से बीटेक किया। सीडीएस में कामयाबी मिलने के बाद 2012 में उन्हें लेफ्टिनेंट का ओहदा मिला। इस वक्त वह इलाहाबाद में मेजर हैं।