चंपावत। राज्य में इस वर्ष राष्ट्रीय खेलों का आयोजन अक्तूबर और नवंबर में प्रस्तावित है। जिला चंपावत सहित समूचे उत्तराखंड के किसी भी विद्यालय में (एलटी) संवर्ग को छोड़कर शारीरिक शिक्षा के टीचर नहीं हैं। वहां भी फिजिकल टीचर पर खेलों की कागजी कार्रवाई, मिड-डे मील प्रभार के साथ-साथ क्लास टीचर के कार्यों का दायित्व भी रहता है। ऐसे में उत्तराखंड के बच्चों को कैसे खेल में आगे बढ़ाया जाएगा।
शारीरिक शिक्षा का प्रशिक्षण प्राप्त कर चुके बेरोजगारों युवाओं का कहना है कि सरकार चाहे तो प्रत्येक प्राथमिक विद्यालय से लेकर प्रत्येक इंटरमीडिएट कॉलेज तक एक-एक शारीरिक शिक्षक अनिवार्य रूप से रख सकती है, लेकिन ऐसा नहीं हो रहा है। पूर्व में शासन स्तर पर शारीरिक शिक्षकों की तैनाती को लेकर कई बार आश्वासन दिए गए, लेकिन अभी तक कुछ नहीं हुआ है। प्रशिक्षित बेरोजगार बीपीएड संगठन के प्रदेश अध्यक्ष जेसी पांडेय का कहना है कि उत्तराखंड के मुख्यमंत्री, शिक्षा मंत्री और खेल मंत्री को उत्तराखंड के प्रत्येक विद्यालय में प्राथमिक स्तर से शारीरिक शिक्षा विषय को अनिवार्य कर एक-एक शारीरिक शिक्षक को नियुक्त करना चाहिए, इससे यहां के स्कूली बच्चों को इसका लाभ मिलेगा और भविष्य में होने वाली खेल प्रतियोगिताओं में पदक प्राप्त कर सकेंगे।