चंपावत। उत्तराखंड राज्य निर्माण के लिए संघर्ष करने वाले आंदोलनकारियों को सरकारी सेवा में 10 प्रतिशत क्षैतिज आरक्षण के विधेयक को पांच सितंबर को फिर से सदन में रखा जाएगा। धामी कैबिनेट ने पहली सितंबर को इस प्रस्ताव को दूसरी बार मंजूरी दी।
राज्य आंदोलनकारियों ने इस प्रस्ताव का स्वागत किया है लेकिन उनका कहना है कि राज्य गठन के 23 साल बाद भी राज्य की अवधारणा और जन अपेक्षाओं को पूरा करने की दिशा में ठोस काम करने की जरूरत है। ताकि राज्य का संतुलित और विकेंद्रित विकास हो, रोजगार-स्वरोजगार के मौके बढ़ें और गांवों से पलायन रुके।
राज्य बनने के बाद भी भ्रष्टाचार में कमी नहीं आई है। इस दिशा में ठोस काम करने के साथ राज्य के संसाधनों का अधिकतम सदुपयोग करने की जरूरत है। - खीम सिंह बिष्ट।
प्रदेश की तरक्की में भ्रष्टाचार दीमक जैसा बन रहा है। इस पर लगाम लगाकर ही उत्तराखंड को आदर्श राज्य और देवभूमि बनाया जा सकता है। - बहादुर सिंह फर्त्याल, चंपावत।
जिले में महाविद्यालयों की संख्या जरूर बढ़ी है लेकिन गुणवत्ता बेहतर नहीं हुई। शिक्षण संस्थानों को सशक्त करने के साथ रोजगार के अवसर बढ़ाए जाएं। - मंदीप ढेक, चंपावत।
आंदोलनकारियों के सपने पूरे होना तो दूर, उस दिशा में ईमानदारी से कदम भी नहीं बढ़ाए जा रहे हैं। इससे राज्य बनाने का उद्देश्य पूरा नहीं हो पा रहा है। - नवीन मुरारी, लोहाघाट।