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दर्दनाक : आग में झुलसकर देवीधार मंदिर की संन्यासिनी की मौत

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लोहाघाट (चंपावत)। लोहाघाट क्षेत्र के प्रसिद्ध देवीधार मंदिर की सन्यासिनी की आग से झुलसने से मौत हो गई। शुक्रवार तड़के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में उन्होंने इस दिव्यांग संन्यासिनी ने दम तोड़ दिया। देवीधार मंदिर समिति ने नेपाल सीमा से लगे पंचेश्वर (काली, गोरी, सरयू, रामगंगा व धौली नदी के संगम) में उन्हें जल समाधि दी। गमगीन माहौल में श्रद्धालुओं ने सन्यासिनी को अंतिम विदाई दी। देवीधार मंदिर की संन्यासिनी माई उमा गिरी (55) बृहस्पतिवार की देर शाम मंदिर परिसर में बिखरे कूड़े को एकत्र कर जला रही थी। तभी एकाएक संतुलन बिगड़ने से माई आग की लपटों की चपेट में आ गई। चीखपुकार सुनकर आसपास के लोगों ने संन्यासिनी को तेज लपटों से निकाल आनन-फानन में 108 एंबुलेंस से अस्पताल पहुंचाया। मगर बुरी तरह झुलसी सन्यासिनी को नहीं बचाया जा सका। मुख्य चिकित्साधीक्षक डॉ. मंजीत सिंह ने बताया कि 70 फीसदी से अधिक झुलसी हालत में अस्पताल लाई गई सन्यासिनी की शुक्रवार तड़के मौत हो गई। संन्यासिनी को शुक्रवार को पंचेश्वर में जल समाधि दी गई। अंतिम संस्कार में देवीधार मंदिर के बाबा भुवन गिरी, बाबा आदित्यदास, मंदिर समिति के अध्यक्ष जीवन मेहता, प्रकाश राय, व्यापार मंडल अध्यक्ष भैरव राय, प्रहलाद ङ्क्षसह मेहता, सोनू बिष्ट, शिवराज बिष्ट, लालमणि राय, नाथूराम राय आदि मौजूद थे।
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