चंपावत। मौसम विभाग के शुक्रवार को भारी से बहुत भारी बारिश के पूर्वानुमान के बाद जिला प्रशासन ने सात जुलाई को शिक्षण संस्थाओं और आंगनबाड़ी केंद्रों में छुट्टी घोषित कर दी है। डीएम नरेंद्र सिंह भंडारी की ओर से जारी आदेश में कहा गया है कि इंटर तक के सभी शासकीय और अशासकीय स्कूल और आंगनबाड़ी केंद्रों में अवकाश रहेगा। हालांकि शिक्षकों को स्कूल जाना होगा।
वहीं मानसून अवधि में अधिकारी-कर्मचारियों के अवकाश पर रोक लगाई गई है। बेहद जरूरी होने पर डीएम की अनुमति के बाद ही अधिकारी-कर्मचारी मुख्यालय छोड़ सकेंगे। साथ ही अवकाश मंजूर होने की सूरत में अपने स्थान पर द्वितीय अधिकारी का नाम भी प्रस्तावित करना होगा।
चंपावत जिले के आपदा परिचालन केंद्र के नंबर
05965-230819, 05965-230703, 99173-84226, 78953-18895 और टोल फ्री नंबर : 1077
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खतरे के मद्देनजर प्रधानाचार्य घोषित कर सकेंगे स्कूल की छुट्टी
चंपावत। जिले में मानसून अवधि में नदी, नाले, गाढ़, गधेरे और संवेदनशील क्षेत्रों के पास राजकीय स्कूलों के छात्र-छात्राओं की सुरक्षा के मद्देनजर परिस्थितियों के मुताबिक अवकाश घोषित करने का अधिकार प्रधानाचार्य और प्रधानाध्यापक को दिया गया है। डीएम नरेंद्र सिंह भंडारी ने ये आदेश जारी किया है। साथ ही जिले के शहरी क्षेत्रों में भारी बारिश, जल भराव के दौरान भी स्कूलों में छुट्टी करने का प्रधानाचार्य निर्णय ले सकेंगे। संवाद
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भूस्खलन से खतरा बनी एनएच के पास की सड़क
चंपावत जिले के ग्रामीण क्षेत्रों की सात सड़कें बंद
संवाद न्यूज एजेंसी
चंपावत। टनकपुर-पिथौरागढ़ राष्ट्रीय राजमार्ग बृहस्पतिवार को पूरे दिन खुला रहा लेकिन इस पर कई जगह खतरा बना हुआ है। वहीं एनएच पर शहर के पास भूस्खलन से सड़क के एक हिस्से में तेजी से कटाव हो रहा है। एनएच पर एमईएस के पास बारिश से हुए भूकटाव से सड़क सिकुड़ रही है। नागरिकों ने भूकटाव की रोकथाम की मांग की है। वहीं चंपावत जिले की सात ग्रामीण सड़कें बंद हैं। इधर बृहस्पतिवार सुबह मलबा आने से बंद हुई मूलाकोट-कांडे-भुइया, धूनाघाट-बरमतौला, रीठाखाल-मन्टांडे, चमदेवल-जाख गजीना, भनोली-सिब्योली, किमतोली-रौसाल, बांकू-सुल्ला-कनौली, खटोली मल्ली-वैला, धौन-सल्ली और बांकू-सुल्ला सड़क को शाम तक आवाजाही के लिए सुचारु कर दिया गया था।
चंपावत जिले की बंद सात सड़कें
टनकपुर-ठुलीगाड़, लड़ाबोरा-क्वारसिंग, पुनाबे-सिप्टी-न्याड़ी, रीठा-अमोड़ी, धौन-दियूरी-बजौन, चल्थी-नौलापानी और धौन-बड़ोली सड़क।
जिले में बारिश का आंकड़ा (मिलीमीटर)
चंपावत : 15
लोहाघाट : 01
पाटी: 12
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सात किमी सिर पर लादकर सिलिंडर की रिफिलिंग करा रहे ग्रामीण
पूर्णागिरि धाम से लेकर सीमांत चूका तक के ग्रामीणों की बढ़ी मुसीबत
कहीं दूध तो कहीं सब्जी की किल्लत, सड़क बंद होने से मायूस लौटे सिप्टी जीआईसी के 40 से अधिक विद्यार्थी
संवाद न्यूज एजेंसी
पूर्णागिरि धाम/चंपावत। नेपाल सीमा से लगे चूका क्षेत्र के लोग सड़क बंद होने का खामियाजा भुगत रहे हैं। यहां के ग्रामीण रसोई गैस सिलिंडर को रिफिल कराने के लिए टनकपुर गैस एजेंसी जाने के लिए चरण मंदिर से बाटनागाड़ तक सिलिंडर को सिर पर ढोकर लाने को मजबूर हैं। ये नौबत टनकपुर से ठुलीगाड़ जाने वाली सड़क के चार जुलाई की सुबह से बंद होने से है। बृहस्पतिवार को ठुलीगाड़ से जौलजीबी के लिए जाने वाली निर्माणाधीन सड़क पर चरण मंदिर के पास मलबा गिर गया।
वहीं पूर्णागिरि धाम में दूध और सब्जी की आपूर्ति भी प्रभावित हुई है। एसएसबी की बाॅर्डर आउटपोस्ट, पुलिस और वन विभाग की चौकी में तैनात कर्मी-अधिकारियों के लिए जरूरी सामग्री की उपलब्धता भी भारी मशक्कत के बाद हो पा रही है। पूर्णागिरि (कालीगूंठ) क्षेत्र की प्रधान मंजू पांडेय, पूर्व प्रधान पंडित मथुरा दत्त पांडेय, खीमानंद पांडेय, राजेंद्र तिवारी, बबलू तिवारी, सुरेश तिवारी, नाथ पांडेय, दुर्गादत्त तिवारी, दिनेश तिवारी, दयानंद पांडेय, देवीदत्त, नेत्र बल्लभ तिवारी आदि ने वैकल्पिक व्यवस्था करने का आग्रह किया है। वहीं पूर्णागिरि मंदिर समिति के अध्यक्ष पंडित किशन तिवारी ने जल्द से जल्द मार्ग खोलने के लिए उपाय करने की मांग की है।
इधर लगातार भूस्खलन से पुनाबे-सिप्टी सड़क के बंद होने से बृहस्पतिवार को 40 से अधिक छात्र-छात्राएं सिप्टी जीआईसी नहीं पहुंच सके। पुनाबे, सुयालखर्क, पातल, गड़कोट आदि क्षेत्र के बच्चे सड़क बंद होने से मायूस लाैटे। अमरनाथ भट्ट, श्याम सिंह महर, मनोज सहित कई ग्रामीणों ने खतरनाक बनी सड़क को दुरुस्त करने की मांग की है। संवाद
फोटो 06 सीपीटी 10पी व 11पी।
बाटनागाड़ का मलबा हटाने में लगेंगे तीन दिन! बारिश बन रही बाधक
सिंचाई और लोनिवि की टीम मौके पर, जेसीबी, पोकलेन से मार्ग खोलने का हो रहा प्रयास
संवाद न्यूज एजेंसी
टनकपुर (चंपावत)। पूर्णागिरि धाम मार्ग में बाटनागाड़ क्षेत्र में आए भारी मलबे को हटाने का काम युद्धस्तर पर चल रहा है लेकिन बारिश काम में बाधक बन रही है। इसके चलते तीसरे दिन भी मार्ग नहीं खुल पाया। सिंचाई विभाग और लोनिवि के अधिकारी मौके पर डटे हैं। उनका कहना है कि मौसम ने साथ दिया तो मार्ग खोलने में अभी तीन दिन का समय और लग सकता है।
तीन दिन पूर्व हुई मूसलाधार बारिश से बाटनागाड़ में सड़क का करीब पांच सौ मीटर हिस्सा चार फीट ऊंचे मलबे की परत से पट गया है। मार्ग बंद होने से पूर्णागिरि धाम क्षेत्र और आसपास के गांवों का टनकपुर से सड़क संपर्क पूरी तरह कट गया है। प्रशासन की टीम मार्ग खोलने के प्रयास में जुटी है लेकिन रुक-रुक कर हो रही बारिश काम में बाधा पहुंच रही है।
तहसीलदार पिंकी आर्या ने स्थलीय निरीक्षण कर कार्यदायी विभाग को काम में तेजी लाने के निर्देश दिए। सिंचाई विभाग के एसडीओ आरके यादव और लोनिवि की जेई तनुजा देव ने बताया कि मलबा हटाने के लिए जेसीबी और पोकलेन मशीन लगाई गई हैं। डंपरों में भी मलबा भरकर सड़क किनारे डंप कराया जा रहा है। उन्होंने बताया कि बारिश बाधक नहीं बनी तो मार्ग खुलने में तीन दिन का समय और लग सकता है।
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मलबा सड़क किनारे डालने का विरोध
बाटनागाड़ में आया मलबा हटाकर सड़क किनारे डंप किए जाने का ग्रामीण विरोध कर रहे हैं। उनका कहना है कि सड़क किनारे डंप किया जा रहा मलबा बारिश होने पर गांव के लिए खतरा बन सकता है। ग्राम प्रधान प्रतिनिधि गणेश सिंह महर का कहना है कि प्रशासन से मलबे को कहीं और डंप किए जाने का आग्रह किया जा रहा है लेकिन कोई सुनवाई नहीं हो रही है। उन्होंने कहा कि इस संबंध में उच्च अधिकारियों से बात करने के साथ ही सीएम को भी ज्ञापन भेजा जाएगा। संवाद
मलबा आने से पिथौरागढ़ जिले की 13 सड़कों पर यातायात बंद
संवाद न्यूज एजेंसी
पिथौरागढ़। लगातार हो रही बारिश के कारण मलबा और बोल्डर गिरने से पिथौरागढ़ की 13 सड़कें बंद हैं। लोगों को पैदल आवाजाही करनी पड़ रही है। सड़कों के बंद होने से रसोई गैस, सब्जी, दूध सहित अन्य जरूरी सामान की आपूर्ति प्रभावित हो रही है।
पिथौरागढ़ में बुधवार की रात भी बारिश हुई। डीडीहाट में सर्वाधिक 33.50 मिमी बारिश हुई। बृहस्पतिवार की सुबह से बारिश का क्रम शुरू हुआ जो दिन भर जारी रहा। बारिश के चलते 13 सड़कों पर मलबा आ गया। डीडीहाट, मुनस्यारी और धारचूला क्षेत्र में सबसे अधिक सड़कें अवरुद्ध हुई हैं। इसके चलते लोगों को पैदल आवाजाही करनी पड़ रही है। सड़क बंद होने से जहां ग्रामीण क्षेत्रों के लिए रसोई गैस, खाद्यान्न सहित अन्य जरूरी सामान की आपूर्ति प्रभावित हो रही है वहीं ग्रामीण क्षेत्र के दूध और सब्जी उत्पादक अपने उत्पादों को बाजार तक नहीं पहुंचा पा रहे हैं। मौसम खराब होने से कम ही लोग घरों से निकले। पिथौरागढ़, डीडीहाट सहित अन्य कस्बाई बाजारों में भी अन्य दिनों की अपेक्षा सुनसानी रही। लगातार हो रही बारिश से नदी-नालों का स्तर भी बढ़ गया है।
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पिथौरागढ़ में कहां कितनी हुई बारिश
पिथौरागढ़- 6 मिमी, गंगोलीहाट-4.50 मिमी, बेड़ीनाग-3.70 मिमी, डीडीहाट-33.50 मिमी, मुनस्यारी-16.20 मिमी, धारचूला-19.20 मिमी।
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पिथौरागढ़ जिले की ये सड़कें हैं बंद
छिरकिला-जम्कू, बांसबगड़-कोटापंद्रपाला, खेला-गर्गुवा, नाचनी-बांसबगड़, गिनी बैंड-समकोट, डीडीहाट-आदिचौरा-हुनेरा, देवीसूना-खेतारकन्याल-गराली, सानदेव-तुरगोली, जमराड़ी-निशनी, मलकोट-लाेद, नाचनी-बांसबगड़-रायाबजेता, भंडारीगांव-रजवार और तवाघाट-घट्टाबगड़।
भातड़ गांव में मकान का एक हिस्सा क्षतिग्रस्त
डीडीहाट (पिथौरागढ़)। मूसलाधार बारिश से ग्राम सभा खोली भातड़ में बुधवार रात को ललित मोहन उपाध्याय के मकान का एक हिस्सा क्षतिग्रस्त हो गया। राहत की बात रही कि मकान क्षतिग्रस्त होने से किसी भी प्रकार की जनहानि नहीं हुई। वहीं शिव मंदिर वार्ड में पुष्पा देवी के मकान के आंगन की दीवार क्षतिग्रस्त होने से दो मकानों को खतरा पैदा हो गया है। प्रभावित लोगों ने प्रशासन से सुरक्षा व्यवस्था की मांग की है। संवाद
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आदिचौरा-सीढ़ी चामा सड़क पर आवाजाही मुश्किल
डीडीहाट (पिथौरागढ़)। आदिचौरा से सीढ़ी चामा सड़क पर लोगों के लिए आवाजाही मुश्किल हो रही है। लगातार हो रही बारिश के कारण सड़क पर आ रहा मलबा लोगों के लिए मुसीबत बना हुआ है। लोग जान जोखिम में डालकर आवाजाही कर रहे हैं। जरूरी सामान को मलबा पार करके पहुंचाया जा रहा है। लोगों को डीडीहाट आने में भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। एसडीएम अबरार अहमद ने सभी विभागों के अधिकारियों और कर्मियों को मानसूनकाल में अलर्ट रहने, क्षेत्र के राजस्व उपनिरीक्षकों को क्षेत्र में बने रहने के निर्देश दिए हैं। वहीं सड़कों के बंद होने पर सड़कों को तुरंत खुलवाने के इंतजाम करने के निर्देश भी विभागों को दिए गए हैं। संवाद
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अधिकारियों को कार्यक्षेत्र न छोड़ने के निर्देश
पिथौरागढ़। आपदा काल को देखते हुए डीएम रीना जोशी ने अधिकारियों को बिना अनुमति के मुख्यालय या कार्यक्षेत्र न छोड़ने के निर्देश दिए हैं। विभागाध्यक्ष को भी अधीनस्थ अधिकारियों या कर्मचारियों के अवकाश के लिए डीएम की अनुमति लेनी जरूरी होगी। उन्होंने अधिकारियों को पेयजल व्यवस्था सुचारु रखने और बिजली बाधित होने पर जल्दी आपूर्ति बहाल करने के निर्देश भी दिए हैं। संवाद
मानसूनकाल में बाधित न होने पाए संचार व्यवस्था
डीएम ने संचार कंपनियों के प्रतिनिधियों के साथ बैठक कर दिए निर्देश
पिथौरागढ़। मानसूनकाल में आपदा के दौरान संचार व्यवस्था बाधित न हो इसके लिए डीएम ने अधिकारियों के साथ बैठक की। उन्होंने कहा कि आपदा के दौरान संचार व्यवस्था किसी भी हाल में बाधित नहीं होनी चाहिए। उन्होंने बीएसएनएल और आइडिया कंपनी से आए प्रतिनिधियों को मानसूनकाल के दौरान नेटवर्क बाधित न हो इसके लिए मोबाइल टावर के लिए पर्याप्त ईंधन का स्टॉक रखने को कहा। उन्होंने जियो नेटवर्क के धारचूला तहसील में चल रहे सभी टावर का निर्माण कार्य जल्द पूरा करने के निर्देश दिए। डीएम ने बीएसएनएल को नेटवर्क व्यवस्था को अधिक सुदृढ़ करने के निर्देश दिए। संचार विहीन क्षेत्र में पुलिस के वायरलेस नेटवर्क और रिपिटर को मानसून काल में ठीक रखने को कहा। बैठक में एडीएम एफआर चौहान, जिला आपदा प्रबंधन अधिकारी भूपेंद्र महर आदि मौजूद रहे। संवाद
हुड्डी नदी से हो रहे भूकटान से हेलागोठ को खतरा
संवाद न्यूज एजेंसी
बनबसा (चंपावत)। बरसाती नदी हुड्डी में ज्यादा पानी आ जाने से हेलागोठ गांव को खतरा पैदा होने लगा है। नदी के पानी से हेलागोठ के तट पर भूकटाव हो रहा है। ग्रामीणों ने प्रशासन और वनविभाग से भूकटाव की रोकथाम की मांग की है।
हेलागोठ के ग्रामीणों का कहना है कि नदी से लगातार हो रहे भूकटाव के कारण गांव पर संकट मंडरा रहा है। जल्द ही भूकटाव रोकने के उपाय नहीं किए गए तो गांव का अस्तित्व मिट जाएगा। पिछले वर्ष हुड्डी नदी के बहाव में गांव के तीन मकान बह गए थे। ग्रामीण हरीश सिंह तड़गी, गंगा सिंह, मोहन सिंह कुंवर, भीम सिंह कुंवर, विनोद सिंह, सुनीता देवी, गंगा देवी, छात्र राहुल सिंह आदि ने प्रशासन से भूकटाव रोकने के लिए शीघ्र जरूरी कदम उठाने की मांग की है।
उधर ग्रामीणों ने कुछ दिन पूर्व हेलागोठ में यूकेलिप्टिस कटान के बाद भारी वाहनों से क्षतिग्रस्त हुए संपर्क मार्ग की मरम्मत भी नहीं कराने का आरोप लगाया। क्षतिग्रस्त मार्ग पर कीचड़ होने से बच्चे स्कूल और आंगनबाड़ी केंद्र नहीं पहुंच पा रहे हैं। शारदा रेंज टनकपुर के रेंजर महेश सिंह बिष्ट ने भूकटाव और क्षतिग्रस्त संपर्क मार्ग को जल्द दुरुस्त कराने की बात कही है।
काकड़-नर्रा मार्ग पर नालियां चोक, सड़क पर बह रहा पानी
आक्रोशित लोगों ने लोनिवि से नालियां खोलने की मांग की
लोहाघाट (चंपावत)। बाराकोट-काकड़ नर्रा मार्ग के किनारे बंद नालियों को न खोलने और झाड़ियों का कटान न होने से क्षेत्रीय लोगों ने नाराजगी है। ग्रामीण ओम प्रकाश सिंह, नवीन सिंह, लक्ष्मण राम, भवान सिंह, भूपाल सिंह, महेश राम आदि का कहना है कि बाराकोट से लेकर काकड़ नर्रा तक करीब दो किमी मार्ग में लोनिवि की सड़क किनारे बनी नालियां पूरी तरह से बंद पड़ी है। नालियों के बंद होने से पानी सड़क पर बह रहा है। साथ ही उनके खेतों को भी नुकसान पहुंचा रहा है। लगातार पानी बहने से सड़क टूट रही है। लोगों का कहना है कि बंद नालियों को खोलने के लिए लोनिवि के अधिकारियों से कई बार मांग की जा चुकी है लेकिन कोई कार्यवाही नहीं हो रही है। चेतावनी दी कि यदि जल्द ही बंद नालियों को नहीं खोला गया तो आंदोलन किया जाएगा। संवाद
आपदा प्रभावितों की अनदेखी के आरोप
बंगापानी (पिथौरागढ़)। युवा कांग्रेस के विधानसभा अध्यक्ष धारचूला प्रकाश गिरी गोस्वामी और ग्राम प्रधान मदरमा उमेश धामी ने आपदा प्रभावितों की अनदेखी का आरोप लगाया है। उनका कहना है कि तांगा, सेराघाट, उमरगड़ा, घरूड़ी, मनकोट और मुवानी-दवानी के लोग सात साल से आपदा का दंश झेल रहे हैं। जगह-जगह भूस्खलन होने से काफी दिक्कतें हो रही हैं। इसके बावजूद सुरक्षात्मक कार्य करने के लिए कोई प्रभावी कदम नहीं उठाए जा रहे हैं। उन्होंने तहसील के माध्यम से डीएम को पत्र भेजकर शीघ्र सुरक्षात्मक कार्यवाही की मांग की है। संवाद