2.59 लाख की आबादी वाले चंपावत जिले में 15 से 20 प्रतिशत लोग ही कर रहे हैं बदलाव
बुजुर्ग ही नहीं युवाओं पर भी कोरोना के बाद पड़ा है असर
संवाद न्यूज एजेंसी
चंपावत। कोविड-19 का लोगों पर गहरा असर पड़ा है लेकिन स्वास्थ्य को लेकर खास जागरूकता नहीं बढ़ी है। स्वास्थ्य विभाग के अनुसार 2.59 लाख की आबादी वाले चंपावत जिले में बमुश्किल 15 से 20 प्रतिशत लोग सेहत के अनुकूल और संयमित दिनचर्या का पालन कर रहे हैं। सर्दी जुकाम, खांसी, बुखार की आहट से लोग दहशत में आ रहे हैं लेकिन बचाव के असरकारक उपाय नहीं कर रहे हैं।
सीएमओ डॉ. केके अग्रवाल का कहना है कि मनोविकार, घबराहट, ह्दयगति, दिल की बीमारी, सांस के मामले बढ़े हैं। इसकी चपेट में बुजुर्ग ही नहीं युवा भी आ रहे हैं। 2021 से अब तक 255 लोगों की अकेले हृदयगति से जान गई है। कुछ जागरूक लोग जरूर नियमित अंतराल पर लक्षण के अनुरूप जांच करा रहे हैं। सीएमओ कोरोना के बाद लोगों को संतुलित खानपान, हल्का व्यायाम और तनाव से बचने के लिए ध्यान के साथ पसंदीदा काम करने की नसीहत देते हैं।
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हेल्थ फॉर ऑल का सपना नहीं आसान
चंपावत जिले के 21 सरकारी अस्पतालों में से तीन को छोड़ बाकी जगह इलाज का टोटा
नेपाल सीमा से लगे एकमात्र तामली अस्पताल में फार्मासिस्ट कर रहा इलाज
संवाद न्यूज एजेंसी
चंपावत। शहर के तीन अस्पताल को छोड़ चंपावत जिले की दो लाख से अधिक की आबादी के लिए स्वास्थ्य सेवा गांव में उपलब्ध नहीं है। 85 प्रतिशत ग्रामीण क्षेत्र स्वास्थ्य की मामूली सुविधा से दूर है। नेपाल सीमा से लगे गांव स्वास्थ्य सुविधा से वंचित हैं। तल्लापाल, लधिया घाटी के भी ऐसे ही हाल हैं। जिले में 107 डॉक्टरों में से 85 प्रतिशत आबादी वाले ग्रामीण क्षेत्रों में महज 17 डॉक्टर हैं। नेपाल सीमा से लगे 90 किलोमीटर की भारतीय सीमा की स्वास्थ्य व्यवस्था बेहाल है। सिर्फ एक अस्पताल तामली में और डॉक्टर नहीं है। फार्मासिस्ट संजय वर्मा ने दवा देने के साथ बृहस्पतिवार को ग्रामीणों का इलाज किया। तामली के डॉक्टर के प्रशिक्षण पर जाने से फिलहाल अस्पताल डॉक्टर विहीन है। 107 डॉक्टरों के सृजित पदों के सापेक्ष अनुबंध वाले डॉक्टरों सहित संख्या पूरी है लेकिन विशेषज्ञ डॉक्टरों की कमी है। टनकपुर और लोहाघाट के आईसीयू के काम नहीं करने से मरीजों को दूसरे अस्पतालों में जाना पड़ रहा है। ग्रामीण प्रतिनिधियों का कहना है कि गांवों की स्वास्थ्य सुविधा को सुधारे बगैर जिले की सेहत को संवारने का कोई मतलब नहीं है।
चंपावत जिले में ये हैं स्वास्थ्य सेवाओं के हाल:
1. तीन (चंपावत, लोहाघाट और टनकपुर) अस्पतालों को छोड़ जिले के 18 स्वास्थ्य केंद्रों में प्राथमिक इलाज लायक भी सुविधा नहीं।
2. तीन (चंपावत, लोहाघाट और टनकपुर) को छोड़ किसी भी अस्पताल में एक्सरे की सुविधा नहीं।
3. चंपावत को छोड़ किसी भी अस्पताल में गायनाकोलॉजिस्ट नहीं।
4. टनकपुर और लोहाघाट के आईसीयू में ताले लटके हैं।
5. टनकपुर और लोहाघाट के ट्रॉमा सेंटर का सात साल बाद भी संचालन नहीं।
6. जिले के किसी भी अस्पताल में ह्दयरोग विशेषज्ञ, माइक्रोबायलॉजिस्ट, यूरोलॉजिस्ट, मानसिक रोग विशेषज्ञ, न्यूरोसर्जन नहीं।
7. चंपावत को छोड़ किसी भी अस्पताल में ऑपरेशन की सुविधा नहीं।
8. नेपाल सीमा से लगे एकमात्र तामली अतिरिक्त प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में खून की नियमित जांच की सुविधा नहीं।
9. पाटी अस्पताल परिसर में 2.60 करोड़ रुपये की लागत से बना डॉक्टरों का पारगमन आवास का उपयोग नहीं।
कोट
चंपावत जिले की स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार हो रहा है। जिला अस्पताल में आईसीयू के संचालन से लेकर डायलिसिस तक की सुविधा है। यहां ऑपरेशन भी हो रहे हैं। विशेषज्ञ डॉक्टरों की कमी को दूर करने के लिए महानिदेशालय से आग्रह किया गया है। नेपाल सीमा सहित समूचे ग्रामीण क्षेत्रों की सुविधाओं में सुधार के लिए काम किया जा रहा है।
डॉ. केके अग्रवाल, सीएमओ, चंपावत।