चंपावत। गौरा महोत्सव दौरान महिला श्रद्धालुओं ने भजनों और लोक गीतों के जरिए गौरा और महेश को विदाई दी। बालेश्वर मंदिर में प्रतिमाओं का विसर्जन किया गया। मल्लीहाट में सातूं-आठूं पर्व का समापन हुआ। शुक्रवार को मल्लीहाट में जानकी बिष्ट के आवास में गौरा महेश को विदाई दी गई।
इससे पूर्व महिलाओं ने गौरा महेश की पूजा अर्चना की। महिलाओं ने झोड़ा और चांचरी का गायन किया। उन्होंने शिवजी बैल में मैया शेर में, गौरा नै जा नूं कैलाशा मेरी गौरा.. आदि गीतों का गायन किया। महिलाओं ने मल्लीहाट से बालेश्वर मंदिर तक गौरा और महेश की शोभा यात्रा निकालने के बाद मूर्तियों का विसर्जन किया। आयोजन में सरोज पांडेय, भावना बिष्ट, आशा खर्कवाल, शांति पटवा, निर्मला पांडेय, जया पांडेय, गिरजा पांडेय, सुमन वर्मा, पुष्पा पांडेय, हेमा पटवा, लीला पटवा, पुष्पा वर्मा, मीरा खर्कवाल, मंजू साह, मेनका साह, प्रियंका तिवारी, दीपा तिवारी, हेमा जोशी, तारा पंत ने सहयोग दिया।
भीम सिंह योद्धा रिस रिसाना...
लोहाघाट (चंपावत)। लोहाघाट और बाराकोट के गांवों में गौरा महोत्सव की धूम मची हुई है। गुमदेश के चमदेवल, जिंडी, लुपड़ा, नरसों, सुनकुरी, निडिल आदि क्षेत्रों के साथ लोहाघाट के सुंई और कोलीढेक आदि क्षेत्रों में महिलाओं ने गौरा गायन किया। लोहाघाट के जिंडी गांव कमेटी के अध्यक्ष पं. मदन कलौनी की अगुवाई में महिलाओं और पुरुषों ने गौरा, धूमारी, चाली का गायन और नृत्य किया। गौरा गायन में महाभारत के भीम सिंह योद्धा रिस रिसाना आदि गीतों का गायन किया। इस मौके पर रमेश चंद, गोपाल राम, गुमान राम,भगत राम, हयात राम, विक्रम सिंह सामंत,नर सिंह सामंत, उमेद सिंह, राजपाल, दीवान सिंह,शंकर सिंह,पूरन सिंह, नारायण सिंह, पुष्पा कालौनी,हेमा देवी, निर्मला देवी, जानकी देवी, बसंती देवी, जमुना देवी, झूपा देवी मौजूद रहे।
गौरा-महेश की मूर्तियों को बालेश्वर मंदिर ले जाती महिला श्रद्धालु। संवाद