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Champawat News: अमृत भारत स्टेशन और वंदे भारत ट्रेन योजना में अतिक्रमण बाधक

Tue, 16 May 2023 11:50 PM IST
हल्द्वानी ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, चम्पावत
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रेलवे लाइन के पास अतिक्रमण की जद में आ रहे भवन। संवाद
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टनकपुर (चंपावत)। काली कुमाऊं के अंतिम रेल हेड टनकपुर रेलवे स्टेशन को अमृत भारत योजना के तहत हाईटेक बनाने के साथ ही वंदे भारत ट्रेन चलाने की तैयारी है। रेलवे की भूमि पर हुआ अतिक्रमण रेल सेवा के इस विस्तार में अवरोध बना है। अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई में नगर पालिका और रेलवे के बीच भूमि विवाद सुलझ नहीं पा रहा है। विवाद सुलझाने को कई बार हो चुकी बैठकों में भी कोई नतीजा नहीं निकल पाया है। ऐसे में रेल सेवा के विस्तार की प्रस्तावित योजनाएं समय पर पूरी हो पाएंगी, इसमें संदेह है। विवाद का जल्द समाधान नहीं हुआ तो दोनों योजनाएं खटाई में पड़ सकती हैं।
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रेल मंत्रालय की अमृत भारत स्टेशन योजना में नगर का रेलवे स्टेशन भी शामिल है। जिसके तहत स्टेशन में यात्री सुविधाओं के विस्तार की योजना है। अतिरिक्त यार्ड का निर्माण, प्लेटफार्म का विस्तार, एक्सलेटर (इलेट्रिक स्वचालित सीढ़ी ), पिट लाइन का निर्माण, हाईटेक शौचालय, रिफ्रेसमेंट रूम आदि कार्य होने हैं। स्टेशन के आसपास रेलवे की भूमि पर अतिक्रमण के चलते यह कार्य अधर में लटके हैं। रेलवे प्रशासन टनकपुर से वंदे मातरम ट्रेन चलाने की भी तैयारी कर रहा है। इसके लिए अलग पिट लाइन का निर्माण होना है। इज्जतनगर मंडल के जनसंपर्क अधिकारी राजेंद्र सिंह का कहना है कि रेलवे की भूमि से अतिक्रमण हटने के बाद ही प्रस्तावित कार्यों का निर्माण शुरू हो पाएगा। उन्होंने बताया कि 15 अगस्त तक देशभर में 15 वंदे भारत ट्रेनों का संचालन शुरू होना है। टनकपुर से भी इस ट्रेन को चलाने की तैयारी है, लेकिन इसमें रेलवे की भूमि पर अतिक्रमण बाधक बन रहा है।
इनसेट
-विष्णुपुरी में पाटे गए नाले तक अपनी भूमि बताता है रेलवे
रेलवे प्रशासन विष्णुपुरी कॉलोनी में पुराने नाले को पाटकर बनाई गई सड़क तक अपनी भूमि बताता है। सीनियर सेक्शन इंजीनियर आरके मिश्रा के मुताबिक पाटे गया नाला रेलवे की भूमि का सीमांकन था। इसके अलावा स्टेशन के आसपास की भूमि पर करीब सौ से ज्यादा कच्चे-पक्के मकान अतिक्रमण की जद में हैं।
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इनसेट
जिस भूमि को रेलवे अपनी बताता है वह भूमि नगर पालिका प्रशासन अपनी होने का दावा कर रहा है। ईओ भूपेंद्र प्रकाश जोशी का कहना है कि 1960 के बंदोबस्ती दस्तावेजों में रेलवे की जितनी भूमि दर्ज है उतनी पहले से ही रेलवे के कब्जे में है। नगर पालिका की भूमि को अपना बताकर रेलवे की ओर से जबरन विवाद खड़ा किया जा रहा है।
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