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Champawat News: मरीजों के लिए डोली, सामान ढोने के लिए खच्चर का सहारा

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सविता। - फोटो : CHAMPAWAT
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चंपावत। नेपाल सीमा पर स्थित तल्लादेश आज भी विकास से कोसों दूर है। ग्रामीण सड़क न होने के कारण यहां के तीन हजार से अधिक लोगों को गांव में हर सामग्री खरीदने पर 40 से 50 प्रतिशत अधिक कीमत चुकानी पड़ रही है। यानी कि एक प्रकार से रोड नहीं होने का सरचार्ज देना पड़ रहा है। रोड से 12 किलोमीटर दूर बकोड़ा में एक किलोग्राम नमक का एक पैकेट 11 रुपये के बजाय 16 रुपये में मिलता है। साइकिल, बाइक और जीप से दूर रोड विहीन इन गांवों के लिए खच्चर अकेला मालवाहक है लेकिन इसका भाड़ा भी प्रति क्विंटल 500 रुपये देना होता है। सबसे ज्यादा भवन निर्माण में है। भाड़े की वजह से बकोड़ा में सीमेंट के दाम 60 प्रतिशत ज्यादा हो जाते हैं।
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सड़क न होने से मरीज को बकोड़ा से डोली से मंच तक लाने में चार घंटे से अधिक का समय लगता है। मंच-बकोड़ा गांव की 12 किलोमीटर की सड़क 11 साल पहले मंजूर हुई थी मगर काम आज तक शुरू नहीं हो सका है। विभाग इसकी वजह वन अनापत्ति का नहीं मिलना बता रहा है। लोक निर्माण विभाग के ईई बीसी पंत का कहना है कि 12 किमी लंबी इस सड़क का प्रस्ताव भेजा गया है। वन भूमि हस्तांतरण की प्रक्रिया पूरी होने के बाद निर्माण शुरू हो सकेगा। संवाद
घरेलू सामग्री की कीमतों में अंतर
सामग्री, मंच बकोड़ा की कीमतें (प्रति किग्रा रुपये में)
नमक 11 16
गुड़ 40 55
आटा 26 32
चावल 47 60
मंच-बकोड़ा सड़क से जुड़ने वाले 17 गांव
पनतौला, खुलकना, ग्वानी, मरथपला, स्यूतौला, बसेड़ी, खटगरी, सूना गांव, मटकांडा, बकरौला, डांडा, बकोड़ा, मथार, अकरी, मोष्टी, बांस और मोस्टा।
सड़क नहीं होने के नुकसान:
-सड़क तक पहुंचने के लिए चार घंटे लगते हैं।
- इलाज के लिए डोली का आसरा।
- प्रभावित हो रहा क्षेत्र का विकास।
सड़क न होने से गांव तक सामान पहुंचाना बड़ी चुनौती है। पगडंडी से घोड़े-खच्चर से सामान पहुंचाने में 500 रुपये क्विंटल से अधिक ढुलान किराया लगता है।
- दिनेश बोहरा, बीडीसी सदस्य, बकोड़ा।
रोड नहीं होने की मार हम सभी ग्रामीण भुगत रहे हैं। इंटर की पढ़ाई के लिए बच्चे या तो 12 किमी दूर मंच पैदल जाते हैं या किराये पर वहीं डेरा बनाकर रहने को मजबूर हैं। -महेंद्र सिंह रावत, ग्राम प्रधान, बकोड़ा।
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एक दशक से अधिक समय से मंजूर सड़क पर काम शुरू न होना इस ग्रामीण क्षेत्र की उपेक्षा की मिसाल है। रोड न होने से बकोड़ा और यहां के दूरस्थ गांवों में अफसर भी दौरा नहीं कर पाते हैं।
शेर सिंह महर, मंच।
रोड नहीं होने से शिक्षा और स्वास्थ्य पर सबसे ज्यादा मार पड़ रही है। गांव के लोग बच्चों को पढ़ाने से लेकर इलाज के लिए शहर में आने को मजबूर हैं। - सविता, बकोड़ा।
मंच-बकोड़ा सड़क की वन अनापत्ति पत्रावली प्रक्रिया में है। नोडल विभाग से मंजूरी के बाद अब यह पत्रावली भारत सरकार को भेजी गई है। अनुमोदन मिलने के बाद भूमि का स्वामित्व लोनिवि को मिल जाएगा जिसके बाद लोनिवि सड़क का काम शुरू हो सकेगा। -आरसी कांडपाल, डीएफ ओ, चंपावत।

शेर सिंह महर।- फोटो : CHAMPAWAT

ग्राम प्रधान महेंद्र सिंह रावत।- फोटो : CHAMPAWAT

दिनेश बोहरा, बीडीसी सदस्य।- फोटो : CHAMPAWAT

सड़कविहीन बकोड़ा गांव में इस तरह खच्चर पर ढोकर ले जाया जाता है सामान। संवाद- फोटो : CHAMPAWAT

सड़कविहीन बकोड़ा गांव को सामान ढोकर ले जाते ग्रामीण। संवाद- फोटो : CHAMPAWAT

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