चंपावत। देश की आजादी के 75 साल सोमवार को पूरे हो रहे हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वर्ष 2022 तक सभी बेघरों को घर उपलब्ध कराने के लिए जून 2015 में पीएम आवास योजना शुरू की थी लेकिन तमाम प्रयासों के बाद भी चंपावत जिले में यह सपना साकार नहीं हो सका। किफायती आवास के लिए जमीन तक नहीं मिल सकी है। अब इस योजना की लक्ष्य तिथि को आगे बढ़ा दिया गया है।
प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) के लिए जिले के चार नगरों में 1831 लोगों ने आवेदन किया। इनमें से फिलहाल 90 मकान ही पूरे हो सके हैं। 66 मकान निर्माणाधीन हैं। 176 लोग ऋण आधारित योजना से निर्माण करा रहे हैं जबकि 1499 शहरी भूमिहीनों के मकान बनाने के लिए जमीन ही नहीं मिल सकी है। टनकपुर में ज्ञानखेड़ा और विष्णुपुरी क्षेत्र के दो लोगों को इस योजना के लिए चयनित किया गया है जबकि भूमि का स्वामित्व न होने के कारण लोहाघाट नगर पालिका और बनबसा नगर पंचायत क्षेत्र के लोगों को इस योजना का लाभ नहीं मिल पा रहा है।
जिले के चार नगर निकायों में से लोहाघाट नगर क्षेत्र पूरी तरह नजूल भूमि में होने के कारण लाभ से वंचित है। टनकपुर का भी बड़ा हिस्सा वर्ग चार या खाम भूमि पर बसा है। बनबसा में भी ऐसी ही अड़चन आ रही है। इस वजह से इन इलाकों के आवेदन स्वीकृत नहीं हो पा रहे हैं। भूमिहीनों के मकान बनाने के लिए जमीन की तलाश की जा रही है। - महेश चौहान, प्रबंधक, राज्य शहरी विकास अभिकरण, चंपावत।
यहां जर्जर मकान का ही सहारा
ग्रामीण भी कर रहे अपनी छत का इंतजार
चंपावत। गांवों में भी बेघरों को तय समय के भीतर छत नहीं मिल पा रही है। कई लोगों को तो आवास के लिए पात्र ही नहीं माना गया। कई लोग जर्जर मकान में रहने के लिए मजबूर हैं। जिले में 2021-2022 तक ग्रामीण क्षेत्र में 1896 लोगों का चयन इस योजना के लिए हुआ लेकिन इनमें से 1711 ही मकान बन सके हैं। इसके बावजूद चंपावत जिले में अब भी 517 लोग आवासहीन हैं। इनमें से ज्यादातर लोगों को किसी योजना में शामिल भी नहीं किया गया है। कई गांवों में योजना के लिए हुए सर्वे पर भी लोग सवाल उठा रहे हैं। इसके बावजूद डीडीओ एसके पंत का कहना है कि सभी पात्र लोगों को योजना का लाभ मिलेगा।
चौड़ापित्ता ग्राम पंचायत की नीलावती देवी तीन विवाहित बेटों के साथ पुराने मकान में रहती हैं। इस परिवार के पास शौचालय भी नहीं है। यह परिवार आजादी के 75 साल बाद भी खुले में शौच जाने के लिए मजबूर है।
चंपावत ब्लॉक की गोली ग्राम पंचायत के गंगा राम के 11 परिजन आपदा में टूटे मकान में खतरे के बीच रह रहे हैं। कृष्ण राम, हेमलता भी आवासीय अनुदान मांग चुके हैं। बीपीएल होने के बावजूद उन्हें गोशाला तक नहीं मिल सकी है जबकि ग्राम पंचायत की खुली बैठकों में आवास के लिए चयनित लोगों की सूची में दो बार उनका नाम शामिल हो चुका है।
पाटी ब्लॉक के मछियाड़ गांव की जस्सी देवी (81) अंत्योदय श्रेणी के परिवार में रहती हैं। उनके कच्चे मकान की छत भी ठीक नहीं है। मकान के लिए कई बार आवेदन करने के बाद भी योजना का लाभ नहीं मिल पा रहा है।
बाराकोट ब्लॉक के पम्दा गांव में नंदी देवी एक कमरे के पुराने मकान में पांच परिजनों के साथ रह रहीं हैं। बीपीएल श्रेणी की नंदी कई बार आवास के लिए गुजारिश कर चुकी है लेकिन हर बार उन्हें मायूसी मिली है।