ठंड शुरू होते ही गर्म विदेशी कपड़ों की खरीदारी के लिए भारतीय नेपाल का रुख करने लगे हैं। वहीं नेपाल से गर्म कपड़ों की तस्करी भी चल पड़ी है। हर दिन नेपाल से भारी मात्रा में विदेशी जैकेट, जींस पेंट आदि कपड़े भारत के बाजारों में ब्रांडेड कंपनियों का मार्क लगाकर ऊंचे दामों पर धड़ल्ले से बिक रहे हैं।
पहले नेपाल से मादक पदार्थों, इलेक्ट्रानिक्स सामान और कंप्यूटर पार्ट्सों की बड़े पैमाने पर तस्करी होती थी। मादक पदार्थों की तस्करी तो अब भी बड़े पैमाने पर होती है, लेकिन इलेक्ट्रानिक्स आइटम और कंप्यूटर पार्ट्सों की तस्करी बीते जमाने की बात हो गई है। बॉर्डर पर सुरक्षा व्यवस्था तगड़ी हुई तो तस्करों ने भी अपना ट्रेंड बदल डाला। नेपाल में जूते, कपड़े आकर्षक और सस्ते होने से इनकी मांग अधिक है। तस्करों ने भी इलेक्ट्रानिक्स और कंप्यूटर पार्ट्सों की जगह विदेशी जूते और कपड़ों की तस्करी शुरू कर दी है।
ठंड शुरू होने के साथ ही तस्कर गिरोह गर्म कपड़ों की तस्करी करने लगे हैं। टनकपुर के साथ ही बनबसा और खटीमा से लगे बॉर्डर से बड़े पैमाने पर विदेशी जूते और कपड़ों की तस्करी शुरू हो गई है। मुख्य मार्ग से तस्करी करने वाले तो यदाकदा धरे ही जाते हैं, मगर चोर रास्तों से होने वाली तस्करी पर किसी की नजर नहीं रहती है। नेपाल से तस्करी कर लाए जाने वाले जूते और कपड़े नैनीताल, हल्द्वानी, देहरादून, ऋषिकेश के अलावा उत्तर प्रदेश के बरेली समेत विभिन्न शहरों में ब्रांडेड कंपनियों का मार्क लगाकर ऊंचे दामों पर बिक रहे हैं। गत वर्ष कस्टम विभाग ने तस्करी के कई मामले पकड़कर भारी मात्रा में विदेशी गर्म कपड़े जब्त किए थे, लेकिन इस वर्ष अब तक एक भी मामला पकड़ में नहीं आया है।
एसएसबी एवं कस्टम के साथ समन्वय करते हुए सीमा से सटे क्षेत्रों के कोतवाली, थानों और चौकी पुलिस को तस्करी पर अंकुश के लिए निर्देशित किया गया है। शीघ्र ही इस ओर कड़े कदम उठाए जाएंगे। -डीएस कुंवर, एसपी, चंपावत।