छीनीगोठ गांव के दो निर्माण कार्यों में धांधली की पुष्टि के बाद आखिरकार आरोपियों से रिकवरी करा ली गई है। जिला पंचायतराज अधिकारी (डीपीआरओ) सुरेश बेनी द्वारा प्रथम सूचना रिपोर्ट दर्ज कराने की चेतावनी के बाद ये वसूली हो सकी। पूर्व ग्राम प्रधान, ग्राम पंचायत विकास अधिकारी और जूनियर इंजीनियर से 78,894 रुपये वसूली कर ली गई है। अमर उजाला ने 29 मई को इस खबर को प्रमुखता से प्रकाशित किया था।
2012-13 में छीनीगोठ ग्राम पंचायत में पिछड़ा क्षेत्र अनुदान निधि (बीआरजीएफ) से दो लाख रुपये की लागत से गुजर बस्ती नाले पर पुलिया निर्माण और शिव मंदिर के पास ईंट खड़ंजा निर्माण का काम 1.45 लाख से राज्य वित्त से कराया गया। गांव के सामाजिक कार्यकर्ता दिनेश जोशी ने निर्माण में गड़बड़ी का आरोप लगाया था। लगातार आवाज उठाने के बाद मामले की जांच हुई। जांच अधिकारी डीआरडीए के सहायक परियोजना निदेशक (एपीडी) केएन तिवारी और सहायक अभियंता एनबी ओली ने निर्माण में गड़बड़िया पाई। सीडीओ श्याम सुंदर पांगती ने 18 फरवरी को ग्राम प्रधान, ग्राम पंचायत विकास अधिकारी और जेई से 78,894 रुपये वसूल करने के आदेश दिए थे।
डीपीआरओ सुरेश बेनी ने वसूली का नोटिस दिया। ऐसा नहीं होने पर एफआईआर दर्ज कराने की चेतावनी दी गई। तत्कालीन ग्राम पंचायत विकास अधिकारी खिलानंद शर्मा, जेई हयात राम और तत्कालीन प्रधान दिलीप राम ने ये वसूली की। प्रत्येक से 26298 रुपये की वसूली की गई।
ये थीं गड़बड़ियां
जांच रिपोर्ट के मुताबिक 3.8 मीटर स्पान के पुलिया और माप पुस्तिका में अंतर है। कार्य के 97098 रुपये के मूल्यांकन के बजाय भुगतान 72888 यानि 169986 रुपये किया गया। 210 मीटर लंबे और 3 मीटर चौड़े खड़ंजे में निर्माण कार्य के वास्तविक खर्च 136632 के बजाय भुगतान 6006 रुपये ज्यादा 142638 रुपये किया गया।