लोहाघाट नगर को पर्यटन की दृष्टि से विकसित करने में भले ही सरकारी प्रयास नहीं किए गए हैं, लेकिन नगर को प्रकृति से मिले सौंदर्य को उजाड़ने में सरकारी अमले ने कोई कोर कसर नहीं छोड़ी। नगर क्षेत्र में स्थित देवदार के वृक्ष इस शहर की शान रहे हैं, इन्हीं वृक्षों के कारण इस नगर का अस्तित्व भी बना हुआ है, लेकिन पिछले तीन दशक के दौरान दुर्लभ प्रजाति के देवदार का जबर्दस्त दोहन हुआ है।
31 वर्ष के अंतराल में नगर क्षेत्र में लगभग 12 हजार से अधिक देवदार के पेड़ गायब हो गए हैं, जिनमें से करीब एक हजार सूखे पेड़ों का वन निगम ने निस्तारण किया, लेकिन शेष 11 हजार देवदार के पेड़ कहां गए यह किसी को नहीं पता। 1984 में पिथौरागढ़ जिले में आए डीएम विजेंद्र पॉल ने यहां के नगरीय क्षेत्र में स्थित देवदार के पेड़ों में नंबरिंग की थी, तब यहां 15 हजार से अधिक देवदार के वृक्षों की गिनती की गई थी, जिसमें करीब 550 पेड़ आवासीय भवनों के आसपास थे, लेकिन इस वर्ष अगस्त में डीएम दीपेंद्र कुमार चौधरी ने पेड़ों की सुरक्षा के लिए पुन: नंबरिंग करने के आदेश दिए तो असलियत सामने आई। पिछले एक माह से की जा रही नंबरिंग पूरी हो गई है, जिसमें यह बात सामने आई है कि वर्तमान में यहां केवल देवदार के 3145 पेड़ ही रह गए हैं।
पेड़ गायब होने और सूखने पर होगी कार्रवाई
कानूनगो चंद्रप्रकाश के नेतृत्व में राजस्व, नगर पंचायत और वन विभाग के कर्मचारियों ने नंबरिंग में दो सौ पेड़ों में बकायदा नंबर प्लेट लगा दी है। शेष में प्लेट अभी लगनी है। आवासीय भवनों के आसपास के वृक्षों की सुरक्षा की पूरी जिम्मेदारी भवन स्वामी को दी गई है। पेड़ के गायब होने या सूखने पर भवन स्वामी के विरुद्ध कार्रवाई होगी।