देवभूमि में भी मानव तस्करों का जाल तेजी से फैल रहा है। अब तक पड़ोसी देश नेपाल के जरिए हो रही मानव तस्करी पर सुरक्षा एजेंसियों की निगाह थी, लेकिन देवभूमि में पकड़े जा रहे ताजा मामलों ने पुलिस की चिंता बढ़ा दी है। पहाड़ के दुर्गम एवं दूरस्थ गांवों के गरीब परिवारों की बेटियां इन तस्करों के आसान शिकार हैं।
तस्कर इन बेटियों के परिजनों को अच्छे घर में शादी, देश-विदेश में नौकरी का झांसा देकर इन्हें अपनी बातों में फंसा लेते हैं। वहीं किशोरों को भी तरह-तरह के प्रलोभन देकर भटकाया जा रहा है। ऐसे किशोरों को दिल्ली, मुंबई जैसे शहरों के अमीरों के हाथों बेचकर उनकी कोठियों में घरेलू नौकर बनाया जा रहा है।
सीमावर्ती जिले पिथौरागढ़ में करीब चार साल पहले मानव तस्करी का मामला पकड़ में आया तो पुलिस एवं अन्य सुरक्षा एजेंसियां अलर्ट हुई, इसके बाद पुलिस एवं अन्य सुरक्षा एजेंसियों ने सीमावर्ती क्षेत्र के दुर्गम और दूरस्थ गांवों पर भी निगाह रखनी शुरू की है। मानव तस्करी का टनकपुर में पकड़ा गया ताजा मामला भी पिथौरागढ़ जिले के सीमांत गांव से जुड़ा है।
इसमें मानव तस्करी में लिप्त आरोपियों ने योजनाबद्ध तरीके से जौलजीबी के बरम गांव की एक किशोरी को अपने जाल में फंसाकर बेचने की पूरी तैयारी कर ली थी, लेकिन वह एक टैक्सी चालक की समझदारी से बच गई। पुलिस की मानव तस्करी निरोधक इकाई (एंटी ह्यूमन सेल) एवं उसके साथ मिलकर मानव तस्करी पर अंकुश लगाने के काम में जुटी स्वयंसेवी संस्था रीड्स के परियोजना निदेशक जनक चंद एवं सचिव भुवन चंद्र पांडेय के मुताबिक यह धंधा देश में एक कारोबार का रूप ले चुका है, जिसे सरगना बड़े सुनियोजित तरीके से संचालित कर रहे हैं।
एक कड़ी को दूसरी कड़ी के बारे में जानकारी नहीं होती, यही वजह है कि अब तक इस सिंडीकेट को तोड़ा नहीं जा सका है। मानव तस्कर इन लड़कियों को विदेश से लेकर देह व्यापार के अलावा उन राज्यों में भी बेचते हैं जहां लड़कों के मुकाबले लड़कियां कम होती है। वहां के अधेड़ लोग भी 20 से 22 साल की उम्र की लड़की से शादी करते है इसके एवज में मानव तस्करों को मोटी रकम मिलती है।
यह काम हरियाणा और वेस्ट यूपी में बहुत हो रहा है। चंपावत जिले में भी ऐसे कई मामले चर्चाओं में तो आते हैं, लेकिन लोकलाज की डर से पहाड़ के लोग पुलिस के सामने नहीं आते हैं। मानव तस्करी के इस धंधे में विशेषकर किशोरियों को निशाना बनाए जाने से पहाड़ के दुर्गम गांवों में लिंग अनुपात की खाई भी अब बढ़ने लगी है।
मानव तस्कर लड़कों को भी शिकार बनाते हैं, इनसे बाल मजदूरी का काम लिया जाता है। पुलिस की मानव तस्कर निरोधक इकाई की प्रभारी मंजू पांडेय के मुताबिक विदेशों में तो मानव अंगों के लिए भी इनकी तस्करी होती है। हालांकि अभी तक पहाड़ में ऐसा मामला सामने नहीं आया है।