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रोडवेज बस-बाइक की टक्कर में छात्रा की मौत

Sat, 12 Sep 2015 10:25 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, लोहाघाट
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यहां से लगभग नौ किमी दूर पिथौरागढ़ मार्ग पर मरोडखान-बापरू के बीच रोडवेज बस और विपरीत दिशा से आ रही बाइक की टक्कर हो गई। दुर्घटना में बाइक सवार एक छात्रा की मौके में ही मौत हो गई, जबकि एक छात्र और एक छात्रा गंभीर रूप से घायल हो गए, जिन्हें 108 आपात सेवा के जरिए लोहाघाट अस्पताल में भर्ती किया गया है। घायल छात्रा को गंभीर अवस्था में हायर सेंटर रेफर किया गया है। छात्र-छात्राएं छात्रसंघ चुनाव के लिए मोटर साइकिलों में प्रचार के लिए निकले थे।
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छात्रसंघ चुनावों को लेकर प्रचार में गए अमित फर्त्याल, पूजा पाठक और रेनू अधिकारी एक बाइक में सवार थे, जबकि उनके अन्य साथी संदीप पंत, दीपक फर्त्याल, इंदर ढेक, सूरज रावत, जगदीश ओली तीन अन्य बाइकों में थे। एसओ मनोज रतूड़ी के अनुसार पिथौरागढ़ से दिल्ली जा रही बस (यूके 07 पीए 2562) की विपरीत दिशा से आ रही बाइक से टक्कर हो गई, जिससे बाइक में सवार रेनू अधिकारी (21) पुत्री दीवान सिंह अधिकारी निवासी चांदमारी लोहाघाट की मौके में ही मौत हो गई, जबकि अमित फर्त्याल (24) पुत्र त्रिलोचन सिंह 24 निवासी चौमल्ला और पूजा पाठक (21) पुत्री गिरीश पाठक निवासी लोहाघाट घायल हो गई, जिनका स्थानीय स्तर पर इलाज चल रहा है। इलाज कर रहे ईएमओ डा.फरहत और अस्थिरोग विशेषज्ञ डा.अश्वनी पंचाल के अनुसार अमित की स्थिति खतरे से बाहर है, जबकि पूजा के सिर एवं नाक-कान में काफी चोटें आई हैं। उसे हायर सेंटर रेफर किया जा रहा है। पूजा एबीवीपी की ओर से छात्रा उपाध्यक्षा पद की प्रत्याशी हैं, जबकि संदीप पंत महासचिव पद के प्रत्याशी हैं।

पुलिस के अनुसार छात्र-छात्राओं ने हेल्मेट नहीं पहना था। घटना की सूचना पर पर विधायक पूरन फर्त्याल और पुलिस मौके पर पहुंची। पुलिस ने बस कब्जे में लेने के साथ चालक जगदीश जोशी को हिरासत में ले लिया है। प्रत्यक्षदर्शी संदीप पंत के अनुसार पिथौरागढ़ मार्ग से दो बसें एक साथ आ रही थी, एक बस तो निकल गई, दूसरी बस ने बाइक सवारों को टक्कर मारी। इस घटना से पूरा शहर शोक में डूबा हुआ है। अस्पताल में घायलों का हालचाल जानने के लिए भारी भीड़ उमड़ गई थी।
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इलाज के लिए बाहर से दवाएं मंगाने पर रोष
पीपीपी मोड में संचालित अस्पताल में घायलों के इलाज के लिए दवाएं और इंजेक्शन बाहर से मंगाए गए, जिसे लेकर लोगों में भारी आक्रोश है। लोगों का कहना है कि पीपीपी मोड को अनुबंध के अनुसार सरकार की ओर से तीन लाख रुपये प्रतिवर्ष आकस्मिक दवाओं की खरीद के लिए दिया जाता है। ऐसे आपातकाल में यहां दवाएं नहीं मिल रही हैं तो सामान्य दिनों में क्या होता होगा।
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