चंपावत। महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी (मनरेगा) योजना के तहत भिंगराड़ा क्षेत्र में 2011-12 में 1.17 करोड़ रुपये के कामों में धांधली और अपात्र मजदूरों को भुगतान करने के आरोपों की जांच तो विशेष जांच दल (एसआईटी) से चल रही है, मगर जांच पूरी होने में लंबा समय लगेगा। ढाई माह में 36 में से तीन वन पंचायत के मजदूरों से ही पूछताछ हो सकी है। खुद जांच टीम इस बात को कबूलती है।
उच्च न्यायालय के आदेश के बाद मनरेगा धांधली मामले की इस साल सितंबर से एसआईटी से जांच शुरू कराई गई थी। हाईकोर्ट के अधिवक्ता संजय भट्ट की जनहित याचिका पर इस साल 14 अगस्त को अदालत ने एफआईआर करने के आदेश दिए थे। पाटी के बीडीओ की तहरीर पर 15 सितंबर को लोगों के खिलाफ आईपीसी की धारा 409, 420, 467, 468 और 471 के तहत मुकदमा दर्ज किया गया था। पुलिस क्षेत्राधिकारी आरएस रौतेला के नेतृत्व में गठित एसआईटी में पाटी के थानेदार दिवान सिंह के अलावा लोहाघाट के एसओ मनीष खत्री और चंपावत के दरोगा जसवीर सिंह शामिल हैं। धांधली के आरोप भिंगराड़ा क्षेत्र की 36 वन पंचायतों पर लगे हैं। ये वन पंचायतें सैकड़ों किलोमीटर के दायरे में फैली है। साथ ही अधिकांश जगह लंबी पैदल दूरी तय कर पहुंचा जा सकता है।
एसआईटी के अधिकारी भी अलग-अलग जगहों के हैं। एसआईटी के मुखिया सीओ रौतेला का कार्यक्षेत्र भिंगराड़ा से 130 किमी दूर टनकपुर है। बाकी तीन अधिकारियों का फासला भी 25 किमी से 60 किमी तक है। इन अधिकारियों को एसआईटी जांच भी अपने रोजमर्रा के काम के साथ करनी है। खुद जांच टीम का मानना है कि 600 से अधिक मजदूरों के बयानों से लेकर कार्यों के भौतिक सत्यापन तक में महीनों का समय लगेगा। ऐसे में मनरेगा धांधली जांच के नतीजे के लिए लंबा इंतजार करना तय है।