बनबसा (चंपावत)। गणतंत्र दिवस पर सुरक्षा को लेकर अलर्ट पुलिस, एसओजी, एसओटीएफ और वन विभाग की टीम ने तेंदुए की खाल के साथ एक नेपाली युवक को गिरफ्तार किया है। बरामद खाल किसी वन्यजीव तस्कर द्वारा पकड़े गए आरोपी को सीमा पार पहुंचाने को दी थी। गहन पूछताछ के बाद पुलिस ने आरोपी को मय खाल के वन विभाग के सुपुर्द कर दिया है।
भारत-नेपाल सीमा स्थित बैराज गेट पर बृहस्पतिवार को शारदा बैराज चौकी पुलिस सघन चेकिंग में जुटी थी। इसी बीच पुलिस को मुखबिर ने एक युवक के वन्यजीव की खाल के साथ भारत की ओर आने की सूचना दी। इस पर बनबसा थानाध्यक्ष मनीष खत्री, बैराज चौकी इंचार्ज सुरेंद्र सिंह खड़ायत ने एसओजी, एसओटीएफ और वन विभाग की टीम के साथ आरोपी को पकड़ने की रणनीति बनाई। बैराज चौकी इंचार्ज खड़ायत ने बताया कि सीमा स्तंभ सात के पास पीठ पर बैग लटकाए भारत की ओर आ रहे नेपाल के कंचनपुर जिले के जिला मुख्यालय महेंद्रनगर से लगे ओढ़ा नंबर 15 गोबरिया गांव निवासी तेज जगारी को भारतीय सीमा पर पकड़ा गया। तलाशी में उसके बैग से 2.20 मीटर लंबी और 1.35 मीटर चौड़ी तेंदुए की खाल बरामद हुई।
थानाध्यक्ष खत्री ने बताया कि तेज जगारी को किसी वन्यजीव तस्कर ने खाल भारतीय सीमा पर पहुंचाने को दी थी। इसके एवज में उसे दस हजार रुपये मिले थे। आरोपी खाल देने वाले वन्यजीव को पहचान तो सकता है, लेकिन उसका नाम-पता नहीं जानता है। बहरहाल, आरोपी के खिलाफ वन्यजीव संरक्षण अधिनियम 1972 की धारा 2/9/39/42/46/50/51 के तहत मुकदमा दर्ज कर अग्रिम कार्रवाई के लिए मय खाल के वन विभाग के सुपुर्द किया गया है। पकड़ने वाली टीम में थानाध्यक्ष खत्री, बैराज चौकी इंचार्ज खड़ायत के अलावा एसओजी इंचार्ज विनोद यादव, एसओटीएफ इंचार्ज भाष्कर बड़ोला, कांस्टेबल नवल किशोर, दीपक प्रसाद, बृजेशी कुमार, जीवन चंद, वन दरोगा कमालुद्दीन, वन रक्षक बाबू राम, भुवन कांडपाल शामिल थे।
..तो सीमावर्ती क्षेत्र में तेजी से सक्रिय हो रहा वन्यजीव तस्कर गिरोह
बनबसा (चंपावत)। भारत-नेपाल सीमा पर वन्यजीव तस्करों का गिरोह दोनों ओर खासा सक्रिय है। बनबसा बार्डर पर 26 दिन के अंदर वन्यजीव तस्करी का यह दूसरा मामला पकड़े जाने से सुरक्षा एजेंसियों के साथ ही वन विभाग की चिंता बढ़ गई है। सवाल उठता है कि पकड़ी जा रही वन्यजीवों की खालें नेपाल के जंगलों में मारे जा रहे वन्यजीवों की है या फिर नेपाल सीमा से लगे भारतीय जंगलों में वन्यजीवों का शिकार हो रहा है।
पिछले कुछ दिनों से नेपाल सीमा से लगे इस क्षेत्र में वन्यजीवों की खाल एवं अंगों की तस्करी के काफी मामले पकड़े जा चुके हैं। 31 दिसंबर 2017 को भी बनबसा पुलिस, एसटीएफ एवं वन विभाग की टीम द्वारा बाघ की खाल पकड़ी गई थी। इससे पहले खटीमा में भी तेंदुओं की दो खालों के साथ इसमें लिप्त लोगों को दबोचा गया था। वन्यजीव अंगों की तस्करी के मामले आए दिन उजागर होने से यह तो साफ है कि भारत-नेपाल के इस संवेदनशील सीमावर्ती क्षेत्र में वन्यजीव तस्कर गिरोह का नेटवर्क काफी फैला हुआ है।