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कोरोना की मार : नहीं हो सका डीपीसी का गठन, अधर में लटकी जिला योजना

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डीएम सुरेंद्र नारायण पांडेय। - फोटो : AMAR UJALA
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अमर उजाला ब्यूरो, चंपावत। मौजूदा वित्त वर्ष 2020-21 को ढाई माह बीत चुके हैं, लेकिन अभी तक जिला योजना पास नहीं हो सकी है। इसकी बड़ी वजह डीपीसी (जिला नियोजन समिति) का गठन नहीं होना है। 24 मार्च को होने वाले डीपीसी के चुनाव कोरोना वायरस महामारी के चलते लटक गए। नतीजा यह हुआ कि जिला योजना अभी तक पास नहीं हो सकी है। चंपावत जिले की पिछले वित्त वर्ष की 35.31 करोड़ रुपये की जिला योजना अनुमोदित थी। जिसमें से शत-प्रतिशत राशि मिली और पूरी रकम खर्च हुई, लेकिन इस बार अभी तक योजना का अनुमोदन तक नहीं हुआ। वैसे इस बार योजना की रकम पिछले साल की अपेक्षा 10 प्रतिशत अधिक करने का नियोजन विभाग का प्रस्ताव था, लेकिन जिला योजना की तमाम कवायद डीपीसी का गठन नहीं हो पाने से अटक गई। अलबत्ता अब विकास कार्यो में ठहराव न आए, इसके लिए डीपीसी के गठन होने तक जिलाधिकारी को नए कार्यो के प्रस्ताव के अधिकार दिए गए हैं। डीएम के स्तर से प्रस्तावित योजनाओं को सरकार के अनुमोदन के बाद मंजूरी मिलेगी।  कोट  जब तक डीपीसी का गठन नहीं होता, तब तक 2020-21 की जिला योजना के नए कार्यो के लिए जिला स्तर से प्रस्ताव भेजा जाएगा। सरकार के अनुमोदन के बाद इन प्रस्तावों पर कार्य शुरू किया जाएगा। -::: तीन किस्ताों में मिले 8.95 करोड़ रुपये: चंपावत। प्रदेश सरकार ने अन्य जिलों की तरह चंपावत को भी तीन किस्तों में आठ करोड़ 95 लाख दो हजार रुपये आवंटित किए हैं। जिला अर्थ एवं संख्याधिकारी एनबी बचखेती ने बताया कि इस राशि का उपयोग तीन मदों में किया जाना है। सरकारी विभागों के संविदा कर्मियों के मानदेय, बची रकम का 60 प्रतिशत पुराने अधूरे कार्यो और शेष 40 फीसदी कोविड-19 के खतरे से बचाव व इससे प्रभावित अर्थव्यवस्था को सुधारने में ये राशि खर्च होनी है। अब तक 2.01 करोड़ रुपये मानदेय और 4.16 करोड़ रुपये विभिन्न विभागों के लंबित कार्यो को पूरा कराने में उपयोग में लाए जा रहे हैं। बचे 2.78 करोड़ से कोविड-19 के बचाव और प्रवासी लोगों की कारोबारी गतिविधियों को गति देने में खर्च किए जा रहे हैं।
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