फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

किसानों की आय बढ़ाने का सहारा बनेगी पीएमकेवीवाई

विज्ञापन
परंपरागत कृषि विकास योजना के तहत पाटी क्षेत्र में प्रशिक्षण देते उद्यान विभाग के प्रशिक्षक। संव - फोटो : CHAMPAWAT
विज्ञापन
चंपावत। खेती में आय बढ़ाने के लिए परंपरागत कृषि विकास योजना (पीएमकेवीवाई) सहारा बनेगी। चंपावत जिले में प्रायोगिक रूप से तीन साल के लिए शुरू की गई यह परियोजना अगले पांच माह में पूरी हो जाएगी। उद्यान और बागवानी को पूरी तरह से जैविक पद्धति से किया जा रहा है।
विज्ञापन

वर्ष 2020 से शुरू इस योजना के तहत चंपावत जिले में ट्रायल के रूप में 1012 हेक्टेयर क्षेत्र में खेती की जा रही है। इसके लिए जिले के चार ब्लॉकों में 50 क्लस्टर बनाए गए थे। इस योजना के तहत चयनित 2,065 किसानों को जैविक खेती का प्रशिक्षण दिया जा चुका है। अब इन उत्पादों के जैविक प्रमाणीकरण के लिए दो महीने के भीतर आवेदन किया जाएगा।
पीएमकेवीवाई से जिले में आम, सिटरस फल, आलू, टमाटर, मिर्च, अदरक, तेजपात की जैविक खेती शुरू की गई थी। इसमें रासायनिक कीटनाशक, खाद, बीजों के बजाय कंपोस्ट से लेकर स्थानीय बीजों का उपयोग किया गया। अब यह योजना पूरी होने वाली है। इन उत्पादों को जैविक प्रमाणीकरण बोर्ड से प्रमाणित कराया जाएगा। सेहतमंद जैविक उत्पादों से खरीदारों समेत किसानों का भी मुनाफा बढ़ेगा। किसानों को 40 प्रतिशत अधिक कीमत मिलेगी।
विज्ञापन

50 गांवों में बनाए गए हैं क्लस्टर
पाटी ब्लॉक (21 क्लस्टर)
गोशनी-1, गोशनी-2, तपनीपाल, होली पिपलाटी, कानाकोट, कमलेख-1, कमलेख-2, देवीधुरा, पाटी, कार्कीछाना, सांगो, पटनगांव, भिंगराड़ा, दुबड़ कमलेख, चल्थियां, रीठा, रकम, चौड़ापिता, चौड़ामेहता, खरही, कुल्यालगांव।
चंपावत ब्लॉक (14 क्लस्टर)
गंगसीर-पोथ, जौल, तलियाबांज, सूखीढांग, खलकंडिया, नरियालगांव-1, नरियालगांव-2, डड़ा बिष्ट, ढकना-1, ढकना-2, नरसिंहडांडा, बाजरीकोट, सिप्टी, गड़कोट।
लोहाघाट ब्लॉक (10 क्लस्टर)
चौड़ीराय, फोर्ती, पऊ, कोलीढेक, मौड़ा, खतेड़ा मल्ला, बांकू, पुंडिल, डनगांव, मड़ुवा।
बाराकोट ब्लॉक (5 क्लस्टर)
गुमोद, संतोला, नौमाना, छंदा, ओखलंज।
किसानों की आय बढ़ाने के लिए पहाड़ में जैविक खेती को प्रोत्साहित करने के लिए यह योजना संचालित है। इससे लोगों को भी शुद्ध उत्पाद मिल सकेंगे। जिले के 50 क्लस्टरों में हुई खेती के उत्पादों को मजखाली के जैविक उत्पाद प्रमाणीकरण परिषद में पंजीकृत कराया जाएगा। इससे इन इलाकों के उत्पादों को जैविक उत्पाद के रूप में मान्यता मिलेगी। - टीएन पांडेय, डीएचओ, चंपावत।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें