चंपावत। जिले में गैर आबाद गांवों को फिर से आबाद किए जाने की कवायद तेज हो गई है। पलायन के कारण खाली हो चुके गांवों को फिर से पुराने स्वरूप में लाने के लिए जल्द ही मुख्यमंत्री पलायन रोकथाम योजना का संचालन किया जाएगा। योजना के तहत जिले में पहले चरण में पलायन की चपेट में आ चुके विभिन्न ग्राम पंचायतों के 43 तोकों और गांवों में रिवर्स पलायन को बढ़ावा दिया जाएगा। योजना के संचालन के लिए जिला प्रशासन की ओर से 1.81 करोड़ रुपये का प्रस्ताव मंजूरी के लिए शासन को भेजा गया है।
सीडीओ आरएस रावत के अनुसार प्रस्तावित योजना के तहत गैर आबाद गांवों को फिर से विकसित करने के साथ वहां पर रोजगारपरक योजनाओं का संचालन किया जाएगा। ताकि इन गांवों में रहने वालों की आर्थिक स्थिति बेहतर बनाई जा सके। चयनित गांवों में बागवानी, डेयरी, कृषि, हॉस्पिटल, सड़कें, पुल, सिंचाई, खेल के मैदान, विद्यालयों आदि को विकसित कर रोजगार को बढ़ावा देने के साथ ही पलायन में भी अंकुश लगेगा। वर्तमान में जिले के पाटी ब्लॉक में 24 तोक और गांव, चंपावत ब्लॉक में 15, लोहाघाट में चार तोक और गांव पलायन के कारण गैर आबाद हो चुके हैं। जिन्हें पहले चरण में शामिल किया गया है। आने वाले चार वर्षों में चरणबद्ध तरीके से अन्य गांवों को भी योजना में शामिल किया जाएगा।
पलायन के कारण गैर आबाद हुए ये गांव
चंपावत। जिले के पाटी ब्लॉक में चौड़ा तोक, भंडारी मछियाड़, चौड़ा, बमौर, डयूडी, गागरी, चसग, गोठ, जमलातोक, तल्लाबगड़, गागरीबगड़, थूम, कोटा, तल्लासेरा, चसगर, हुमार, आटा, बनचौड़ा, कलियाधूरा, दुगानी, चंद्रकोट, सिधौरी, तिमलापाखा और बोलनी गांव पलायन के कारण गैर आबाद हो चुके हैं। जबकि चंपावत विकासखंड में बडोली, रीठा, काम्ताजामरी, नौलापानी, तलियाबांज, बोयल, भड़ियास, नैकाना, दमतोला, भीजर, लधौनटुकड़ा, गायल, पाटली, बाजा और भजनपुर तथा लोहाघाट ब्लाक में सलना, गुड़मांगल, टुंटा बिष्ट और सूर गांव गैर आबाद हैं।
50 किमी के हवाई दायरे में हो सकेंगे विकास कार्य
चंपावत। जिले के नेपाल सीमा से लगने वाले चंपावत और लोहाघाट ब्लॉक में पहली बार संचालित की जा रही मुख्यमंत्री सीमांत क्षेत्र विकास योजना में सीमा क्षेत्र से लेेकर 50 किमी के हवाई दायरे में विकास कार्य कराए जा सकेंगे। इससे पूर्व तक संचालित बीएडीपी योजना में सीमांत क्षेत्र के केवल दस किमी दायरे में ही विकास कार्य कराए जा सकते थे। संवाद