ललित मोहन गहतोड़ी चंपावत। पिताया से चंपावत के बगीचे लहलहाते नजर आएंगे। जिले में ड्रैगन फ्रूट (पिताया) की खेती की जाएगी। उद्यान विभाग परीक्षण के लिए दो काश्तकारों की एक हेक्टेयर भूमि पर इसकी शुरुआत करने जा रहा है। परीक्षण सफल होने पर अधिक काश्तकारों को इससे जोड़ा जाएगा। विभाग ने इसे लेकर कार्ययोजना तैयार की है। जिले के अधिक से अधिक काश्तकारों को इस योजना से लाभान्वित किया जाएगा। अक्तूबर-नवंबर से जिले में इसकी खेती शुरू की जाएगी।
पहली बार चंपावत जिले के खतौली गांव से ड्रैगन फ्रूट पिताया की खेती की जा रही है। यह दक्षिण अमेरिका और मध्य अमेरिका में पाए जाने वाले जंगली कैक्टस की एक प्रजाति है। स्वास्थ्य की दृष्टि से यह फल काफी लाभदायक है।
विभाग ने चंपावत की जलवायु को पिताया की खेती के लिए मुफीद पाया है। खतौली में एक हेक्टेयर भूमि की चकबंदी भी कर दी गई है। इसकी खेती से किसानों को अच्छी आमदनी होगी।
विटामिन सी, प्रोटीन से है भरपूर
इसमें विटामिन सी और प्रोटीन भरपूर मात्रा में पाया जाता है। लाल और बैगनी रंग के इस फ्रूट में फाइबर की मात्रा बहुत अधिक पाई जाती है। बीमारी में भी इसका सेवन लाभकारी है। यह रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने में मददगार है। संवाद
कोट
जिले में पहली बार पिताया की खेती की जाएगी। आमदनी के लिहाज से काश्तकार और पौष्टिकता के लिए उपभोक्ताओं के लिए यह लाभकारी है। अक्तूबर-नवंबर से चयनित भूमि पर इसका प्लांटेशन शुरू कर दिया जाएगा। वर्तमान में बाजपुर क्षेत्र में इसकी खेती की जा रही है। - टीएन पांडेय, जिला उद्यान अधिकारी, चंपावत।