टनकपुर-पिथौरागढ़ राष्ट्रीय राजमार्ग पर चल्थी स्थित निर्माणाधीन पुल। संवाद
चंपावत। टनकपुर-पिथौरागढ़ राष्ट्रीय राजमार्ग पर चल्थी का निर्माणाधीन पुल बस अब दो माह दूर है। पुल का डेक (लेंटर) पड़ चुका है और चार सप्ताह में लेंटर की शटरिंग हटाने के बाद परीक्षण किया जाएगा। ये भार परीक्षण आईआरसी : 51 मानक के दिशा निर्देशों के अनुरूप किया जाता है। 15 अगस्त से पूर्व पुल से वाहनों का संचालन शुरू होने की उम्मीद है। इससे एनएच पर आवाजाही सुगम हो जाएगी।
राष्ट्रीय राजमार्ग पर बारहमासी सड़क परियोजना के अंतर्गत चल्थी पुल पहाड़ और मैदान को जोड़ने की अहम कड़ी है। परियोजना के तहत लधिया नदी पर 120 मीटर लंबा और 14.90 मीटर चौड़ा पुल दिसंबर 2021 तक पूरा होना था लेकिन 18 अक्तूबर 2021 की जबर्दस्त आपदा से निर्माणाधीन चल्थी पुल के पांच जैक और दो फाउंडेशन टावर नदी में समा गए थे। इसके बाद निर्माण पूरा होने की तिथि आगे बढ़ा दी गई। एनएच खंड के ईई, सुनील कुमार ने बताया कि अब पुल का लेंटर पड़ चुका है। 28 दिनों बाद लेंटर की शटरिंग खोली जाएगी। पुल बनने के बाद यहां से आवाजाही सुगम होने के साथ ही 300 मीटर की दूरी भी कम होगी।
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फिलहाल 68 साल पुराने पुल से हो रही आवाजाही
चंपावत। चल्थी के नए पुल से दो महीने बाद आवाजाही शुरू हो जाएगी लेकिन अब तक टनकपुर से 36 किमी दूर चल्थी की लधिया नदी पर ये आवाजाही 110 मीटर लंबे और 10 फुट चौड़े पुल से हो रही है। कम चौड़ाई की वजह से इस पुल से एक समय पर एक ही वाहन गुजर सकता है। वर्ष 1955 में खंभों के बगैर बना पुल का पूरा वजन उसके ऊपरी (धनुष आकार वाले ढांचे पर) हिस्से पर टिका है।