2027 के विधानसभा चुनाव से पहले हल्द्वानी में होने वाली भाजपा की प्रदेश कार्यसमिति की बैठक इस बार महज संगठनात्मक कवायद नहीं, बल्कि कुमाऊं में पार्टी की सियासी रणनीति के लिहाज से अहम मानी जा रही है। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे की हल्द्वानी सभा के बाद हुए कथित ‘शुद्धीकरण’ विवाद और उसके बाद राहुल गांधी के खिलाफ दर्ज एफआईआर ने भाजपा-कांग्रेस के बीच सियासी टकराव बढ़ा दिया है। इसी माहौल में भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन का हल्द्वानी दौरा पार्टी के लिए राजनीतिक नैरेटिव को अपने पक्ष में मोड़ने और संगठन को चुनावी मोड में लाने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है।
9 सितंबर को हल्द्वानी में प्रदेश कार्यसमिति के साथ कोर कमेटी की बैठक होगी। राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन प्रदेश पदाधिकारियों और जिलाध्यक्षों के साथ भी चर्चा करेंगे। पार्टी सूत्रों के मुताबिक बैठकों में संगठन की स्थिति, आगामी विधानसभा चुनाव की तैयारियों और जमीनी फीडबैक पर मंथन अहम रहेगा। राष्ट्रीय अध्यक्ष के स्तर पर विधायकों के प्रदर्शन और चुनावी तैयारियों की समीक्षा की चर्चा भी सामने आई है।
सिर्फ संगठन नहीं, सामाजिक समीकरण भी निशाने पर
भाजपा ने 10 सितंबर को हल्द्वानी में पूर्व सैनिक सम्मेलन और रुद्रपुर में पंजाबी गौरव/सिख सम्मेलन रखा है। एक ही दौरे में इन दोनों वर्गों तक पहुंच बनाने को पार्टी की सामाजिक पहुंच बढ़ाने की रणनीति माना जा रहा है। पूर्व सैनिक कुमाऊं के कई विधानसभा क्षेत्रों में प्रभाव रखने वाला वर्ग है, जबकि ऊधमसिंह नगर की राजनीति में सिख-पंजाबी मतदाताओं की भूमिका महत्वपूर्ण है। इस लिहाज से हल्द्वानी से रुद्रपुर तक कार्यक्रमों की कड़ी को पहाड़ और तराई के अलग-अलग सामाजिक-राजनीतिक समीकरणों को साधने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है। भाजपा के लिए सिख और पूर्व सैनिक समुदाय के बीच सीधा संवाद राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण हो जाता है।
विवाद की टाइमिंग ने बढ़ाया महत्व
5 सितंबर को बेंगलुरु पुलिस ने हल्द्वानी के कथित शुद्धिकरण प्रकरण में भाजपा प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र भट्ट और अन्य के खिलाफ जीरो एफआईआर दर्ज की। शिकायत में नागरिक अधिकार संरक्षण कानून, एससी/एसटी अत्याचार निवारण अधिनियम और भारतीय न्याय संहिता की धाराओं का उल्लेख किया गया है। इससे यह विवाद स्थानीय राजनीति से निकलकर राष्ट्रीय स्तर तक पहुंच गया है। ऐसे में भाजपा की कार्यसमिति बैठक को पार्टी के लिए डैमेज कंट्रोल से आगे बढ़कर चुनावी नैरेटिव तय करने का मंच माना जा रहा है। हालांकि पार्टी की ओर से इन कार्यक्रमों का घोषित उद्देश्य संगठन को मजबूत करना और चुनावी तैयारियों की समीक्षा है।