चंपावत। चंपावत जिले के कई क्षेत्रों में लंपी वायरस (एलएसडी) जैसे लक्षणों से 37 और मवेशियों की बीते 24 घंटों में तबीयत बिगड़ी है। मुख्य पशु चिकित्साधिकारी पीएस भंडारी का कहना है कि जिले में फिलहाल 71 सक्रिय मामले हैं। पशुपालन विभाग के 11 पशु सेवा केंद्रों में पशु प्रसार अधिकारी नहीं होने से भी समस्या आ रही है।
गुमदेश, तल्लादेश, तल्लापाल और लधिया घाटी में मवेशी बीमार पड़ रहे हैं। भुवन जोशी, गुमान, शेर सिंह सहित कई ग्रामीणों ने क्षेत्र में शिविर लगाने के साथ सघन निगरानी और मृत पशुओं के स्वामियों को मुआवजा देने की मांग की है। उनका कहना है कि मवेशियों की मौत होने या बीमार होने से दूध के उत्पादन पर संकट आने से आमदनी कम हो गई है।
पशुपालन विभाग का कहना है कि रोगों से बचाव के लिए जिले भर में 15 टीम बनाई गई हैं। विभाग ने इलाज के अलावा टीकाकरण में तेजी का दावा किया है। सीवीओ भंडारी का कहना है कि निदेशालय को पत्र भेजकर पशु प्रसार अधिकारी सहित फील्ड कर्मियों के खाली पदों को भरने का आग्रह किया गया है।
टनकपुर में तीन पशुओं में लक्षण मिले, इलाज के बाद हुए स्वस्थ
टनकपुर (चंपावत)। पशुओं में लंपी बीमारी के लक्षण मिलने से जिले के मैदानी क्षेत्र टनकपुर और बनबसा में पशु चिकित्सा विभाग अलर्ट हो गया है। बीमारी की रोकथाम के लिए विभाग ने पशुओं का टीकाकरण शुरू कर दिया है। विभाग की टीम पशुओं को टीके लगाने के साथ पशुपालकों को जागरूक भी कर रही है।
जिले के मैदानी क्षेत्र के पशु अब तक लंपी बीमारी से सुरक्षित हैं। पशु चिकित्साधिकारी डॉ. विजय पाल प्रजापति ने बताया कि क्षेत्र में लंपी बीमारी का प्रकोप नहीं है। गैंड़ाखाली, नायकगोठ और थ्वालखेड़ा में तीन पशुओं में लंपी बीमारी के लक्षण मिले थे जो इलाज के बाद स्वस्थ हैं। उन्होंने बताया कि लंपी से बचाव के लिए पशुओं का टीकाकरण शुरू कर दिया गया है। इसके लिए टनकपुर में तीन हजार और बनबसा में दो हजार टीके उपलब्ध हुए हैं। उन्होंने बताया कि टीकाकरण के लिए पांच टीमें गठित की गई हैं जो घर-घर जाकर पशुओं को टीका लगाएंगी। संवाद