अमर उजाला ब्यूरो, चंपावत। गर्भवती महिला को जिला अस्पताल और निजी अस्पताल में इलाज नहीं मिलने के मामले में स्वास्थ्य विभाग ने जांच के आदेश दे दिए हैं। सहायक मुख्य चिकित्साधिकारी डॉ. इंद्रजीत पांडेय को इस मामले में जांच अधिकारी बनाया गया है।
सीएमओ डॉ. आरपी खंडूरी ने बताया कि जल्द से जल्द मामले की जांच पूरी करने को कहा गया है। जिला अस्पताल, जीवन अनमोल अस्पताल के अलावा पीड़ित पक्ष से तीन दिन के भीतर लिखित रूप में पक्ष लेने को कहा गया है।
मंगलवार को चंपावत के खटकना पुल के पास निवासी शहनाज (27) पत्नी अजीम को जिला अस्पताल में प्रसव के लिए भटकना पड़ा। जिला अस्पताल में इलाज की सुविधा नहीं मिली। मंगलवार को जिस निजी अस्पताल में जिला अस्पताल के मरीजो के इलाज की व्यवस्था की गई थी, वहां गर्भवती महिला के परिजनों से 20 हजार रुपये की मांग करने के आरोप लगे। कोविड-19 के 21 संक्रमित लोगों को रखे जाने के बाद जिला अस्पताल के बजाय मंगलवार को निजी अस्पताल (जीवन अनमोल) में सरकारी अस्पताल चलाया गया था। अस्पतालों में इलाज की सुविधा नहीं मिलने पर इस गर्भवती महिला का एक आशा कार्यकर्ता की मदद से घर में ही प्रसव कराया गया। अब मां और नवजात ठीक हाल में हैं।
मामले के संज्ञान में आने पर मंगलवार को जिले के संक्षिप्त दौरे पर आए प्रदेश के कैबिनेट व जिले के प्रभारी मंत्री अरविंद पांडेय ने जांच व जरूरी कार्यवाही के आदेश दिए। डीएम सुरेंद्र नारायण पांडेय ने स्वास्थ्य विभाग को जांच के आदेश दिए, जिस पर सीएमओ ने एसीएमओ को जांच अधिकारी बनाते हुए जल्द से जल्द जांच रिपोर्ट देने को कहा।