चंद्रशेखर जोशी
चंपावत। सप्तेश्वर लघु जल विद्युत परियोजना पर 64.93 लाख रुपये खर्च होने के बाद भी यह परियोजना किसी काम की नहीं है। 150 किलोवाट के दो जनरेटर से ग्रिड में बिजली आपूर्ति होनी थी लेकिन योजना में आई खामी से दो साल से उत्पादन ही नहीं हो रहा है। मरम्मत के बावजूद योजना की खामी दूर नहीं हो सकी। अब एक बार फिर से इसे शुरू करने के लिए प्रस्ताव मुख्यालय भेजा गया है।
सिप्टी क्षेत्र में वर्ष 1990 में सप्तेश्वर में 300 किलोवाट क्षमता की लघु बिजली परियोजना शुरू की गई थी। वर्ष 2009 तक परियोजना से बिजली का उत्पादन भी होता था लेकिन बाद उपकरण खराब होने से परियोजना बंद हो गई। वर्ष 2020 में योजना का नवीनीकरण और मरम्मत कार्य कराया गया।
इसके बाद इस परियोजना का नवंबर 2020 में तत्कालीन मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने लोकार्पण भी किया। 64.93 लाख से मरम्मत होने के बाद कुछ माह तक बिजली का उत्पादन हुआ लेकिन वर्ष 2022 से योजना में एक बार फिर तकनीकी खामी आ गई और तब से बिजली का उत्पादन ठप है। अब उरेडा (उत्तराखंड अक्षय ऊर्जा विकास अभिकरण) ने काम कराने वाली फर्म पर कार्रवाई करने की प्रक्रिया शुरू की है। साथ ही इस परियोजना को फिर से शुरू करने का प्रस्ताव उरेडा मुख्यालय भेजा है। संवाद
परियोजना से ये होता लाभ
सप्तेश्वर लघु जल विद्युत परियोजना से 300 किलोवाट की बिजली का उत्पादन होना था।
उरेडा की इस परियोजना से आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों को बिजली मिलती।
परियोजना से चार स्थानीय लोगों को रोजगार दिया जाना था।
लोकार्पण के कुछ समय बाद भी ठप हुई थी योजना
चंपावत। नवंबर 2020 में लोकार्पण होने के कुछ समय बाद भी योजना में खामी आ गई थी। तब केबल फुंकने से परियोजना से उत्पादन ठप हो गया था। कुछ दिनों बाद खामी को दूर कर इसे शुरू किया गया था लेकिन 2022 से फिर से योजना बंद है।
सप्तेश्वर लघु जल बिजली परियोजना 2022 से काम नहीं कर रही है। काम कराने वाली फर्म पर की बैंक गारंटी जब्त की गई है। साथ ही इस परियोजना को विभागीय बजट अथवा पीपीपी मोड पर संचालित करने के लिए उरेडा के मुख्यालय से दिशा निर्देश मांगा गया है। - चंद्रप्रकाश उपाध्याय, अभियंता, उरेडा, चंपावत।