नवमी पर्व पर मां पूर्णागिरि धाम में उमड़ी श्रद्घालुओं की भीड़।
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टनकपुर (चंपावत)। उत्तर भारत के सुप्रसिद्ध मां श्री पूर्णागिरि मेले में श्रद्धालुओं की आवाजाही बढ़ती जा रही है। रविवार सुबह से सोमवार शाम तक 80 हजार से ज्यादा भक्तों ने देवी मां के दर्शन कर पुण्य अर्जित किया। श्रद्धालुओं की आवाजाही बढ़ने से पूर्णागिरि धाम क्षेत्र में पानी का संकट गहराने लगा है। इधर भीड़ का असर यह रहा कि टनकपुर से मैदान मार्गों पर रोडवेज की बसें कम पड़ने से यात्रियों को काफी परेशानी झेलनी पड़ी। बस स्टेशन में दिनभर यात्रियों का तांता लगा रहा। होली के अगले दिन तीन मार्च से शुरू हुए मेले में इन दिनों श्रद्धालुओं की खासी आवक बढ़ गई है। हर दिन हजारों की संख्या में भक्त दूरदराज के क्षेत्रों से मां पूर्णागिरि के दर्शन को पहुंच रहे हैं। उत्तर भारत के विभिन्न क्षेत्रों के साथ ही देश के कोने-कोने से आते-जाते श्रद्धालुओं के जयकारों से समूचा क्षेत्र गुंजायमान है। साप्ताहिक अवकाश के कारण रविवार से श्रद्धालुओं की आवाजाही तेज रही। इसका असर सोमवार को भी दिखाई पड़ा। टनकपुर से मैदानी क्षेत्रों को जाने वाले यात्रियों के लिए रोडवेज की बसें कम पड़ गई। बरेली डिपो से भी टनकपुर को कम बसों के आने से श्रद्धालुओं को खासी परेशानी का सामना करना पड़ा। एआरएम संचालन केएस राणा के मुताबिक मेले में बढ़ती भीड़ के मद्देनजर बरेली मार्ग पर बसों का संचालन बढ़ाया गया है, लेकिन इसके बाद भी बसें कम पड़ रही है। इधर भीड़ बढ़ने से काली मंदिर, टुन्यास, सिद्धमोड़, नागा क्षेत्र, झूठा मंदिर क्षेत्र आदि स्थानों में पानी की समस्या पैदा होने लगी है। इसके मद्देनजर मंदिर समिति अध्यक्ष पं. भुवन चंद्र पांडेय, जलसंस्थान के जेई गणेश दत्त पांडेय ने पेयजल स्रोतों, टैंकों का निरीक्षण कर स्थिति का जायजा लिया। जेई पांडेय ने बताया कि भीड़ की यही स्थिति रही और बारिश नहीं हुई तो पानी की समस्या पैदा हो सकती है। उनका कहना है कि पहुंच वाले मेला क्षेत्र में तो टैंकरों को जलापूर्ति की व्यवस्था की जाएगी, लेकिन भैरव मंदिर से ऊपर जलापूर्ति का कोई दूसरा विकल्प नहीं है।