चंपावत। जिला अस्पताल में विश्व रक्तदाता दिवस के अवसर पर अमर उजाला फाउंडेशन की ओर से लगाए गए रक्तदान शिविर में 20 लोगों ने रक्तदान किया। राजकीय नर्सिंग कॉलेज की प्रभारी प्रोफेसर रश्मि रावत और डॉ. हरिकांत शर्मा भी रक्तदान करने वालों में शामिल थे।
रक्तदान के लिए सीमा सड़क संगठन, एसएसबी सहित कई क्षेत्रों से बड़ी संख्या में लोग आए थे लेकिन ब्लड बैंक की क्षमता के मद्देनजर 20 लोगों को ही इसकी इजाजत मिल सकी। शेष 15 लोगों के ब्लड ग्रुप और मोबाइल नंबर लेकर पंजीकरण किया गया। अमर उजाला फाउंडेशन की ओर से सीएमओ डॉ. केके अग्रवाल और ब्लड बैंक प्रभारी डॉ. राशी भटनागर ने रक्तदाताओं को प्रशस्ति पत्र दिए।
चंपावत ब्लड बैंक की प्रभारी डॉ. राशी भटनागर के नेतृत्व में रक्तदान कार्यक्रम संपन्न हुआ। पीएमएस डॉ. एचएस ऐरी की मौजूदगी में हुए कार्यक्रम में रक्तदान करने के फायदों के अलावा इससे जुड़ी भ्रांतियां भी बताईं। जन कवि प्रकाश जोशी शूल ने रक्तदान प्रेरित करने की कविता सुनाई। नर्सिंग कॉलेज की प्रभारी डॉ. रश्मि रावत ने रक्तदान करने की प्रेरणा देने के लिए लोगों को शपथ दिलाई। शिविर में लैब तकनीशियन मनोज मेहता, उमेद सिंह बसेड़ा, सावित्री राय, हरीश पांडेय आदि ने सहयोग किया।
रक्तदान करने वाले दानियों के नाम:
राजकीय नर्सिंग कॉलेज की प्रभारी डॉ. रश्मि रावत, प्रोफेसर हरिकांत शर्मा, शुभम वर्मा, शेखर कुमार, पवन सिंह, संदीप गुप्ता, जसबीर सिंह, सुमित कुमार महरा, सचिन नामदेव, रणवीर सिंह, विजय जोशी, सूरज बिष्ट, अमित कुमार, सुरेश सिंह, पंकज कुमार जोशी, डॉ. कमलेश सक्टा, शिव प्रसाद उपाध्याय, हरीश पांडेय, शिवदत्त जोशी और रीतू।
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11 बार खून दे चुके हैं विजय जोशी
चंपावत। स्वास्थ्य विभाग में प्रशासनिक अधिकारी विजय जोशी खून की महत्ता जानते हैं। उन्होंने बुधवार को विश्व रक्तदाता दिवस पर आयोजित अमर उजाला फाउंडेशन के कार्यक्रम में भी रक्तदान किया। लेकिन ये पहला मौका नहीं था। वे इससे पहले दस बार रक्तदान कर लोगों की जिंदगी बचा चुके हैं। जब और जहां जरूरत पड़ती है, जोशी बेहिचक खून दान करते रहे हैं।
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जसबीर को रक्तदान से मिलती है आंतरिक खुशी
चंपावत। सीमा सड़क संगठन के जवान जसबीर सिंह के लिए रक्तदान करना उनकी आदत का हिस्सा है। बुधवार को रक्तदाता दिवस पर उन्होंने सातवीं बार खून दिया है। जसबीर बताते हैं कि रक्तदान करने से उन्हें आंतरिक खुशी मिलती है। ये खून जरूरतमंदों को जिंदगी देता है। कहते हैं कि उन्हें जब भी खून की जरूरत का पता चलता है, वे जरूरतमंद तक पहुंचने का प्रयास करते हैं।