ब्लाक के घेस, हिमनी, पिनाउ, बहतरा तथा बलाड़ सहित आसपास के गांवों के बच्चों को दसवीं के बाद की पढ़ाई के लिए या तो घर से दूर जाना पड़ता है या पढ़ाई छोड़नी पड़ती है। इसका कारण इन गांवों का इंटर कालेज 30 किलोमीटर दूर होना है। ग्रामीण लगातार यहां इंटर कालेज खोलने की मांग कर रहे हैं, लेकिन अभी तक मामले में कोई कार्रवाई नहीं हो पाई है।
जूनियर हाईस्कूल हिमनी में 46 बच्चे, हाईस्कूल घेस में 125 तथा हाईस्कूल बलाड़ में 117 बच्चे पढ़ते हैं, लेकिन इनमें 90 फीसदी बच्चे 11वीं की पढ़ाई नहीं कर पाते। पूर्व प्रधान केशर सिंह बताते हैं कि वर्ष 2015 में 10वीं उत्तीर्ण हुए घेस गांव की दीपा, धना, सावित्री बलाड़ की कमला सहित कई बच्चे 11वीं में प्रवेश नहीं ले सके।
चालू सत्र में घेस स्कूल से कक्षा 10 की परीक्षा दे रही प्रभा, राकेश, हरेंद्र और तेजपाल कहते हैं कि यदि सीएम की घोषणा के अनुरूप इस बार स्कूल का उच्चीकरण हो जाता है तो ही आगे की पढ़ाई कर पाएंगे।
सरपंच कुंदन सिंह भंडारी ने कहा कि इस क्षेत्र का इंटर कालेज 30 किलोमीटर दूर देवाल में है। ऐसे में 11वीं की पढ़ाई के लिए बच्चों को देवाल में कमरा लेकर रहना पड़ता है। कई गरीब बच्चे हाईस्कूल के बाद दाखिला नहीं दे पा रहे हैं।
हालांकि मुुख्यमंत्री हरीश रावत ने एक वर्ष पूर्व हाईस्कूल घेस का उच्चीकरण करने की घोषणा की थी, लेकिन अभी तक घोषणा धरातल पर नहीं उतर पाई है। दूसरी ओर खंड शिक्षा अधिकारी बीसी मिश्रा ने बताया कि सीएम की उच्चीकरण की घोषणा के बाद मामले की पत्रावलियां तैयार कर शासन को भेज दी गई हैं। शासनादेश होने के बाद अग्रिम कार्रवाई की जाएगी।