सिमली बाजार में मजदूरी करने वाले राम विलास, सत्यनारायण, भीम, अर्जुन, ओमप्रकाश, सीता देवी, राजीव, लक्ष्मी देवी, गीता देवी आदि सरकार की ओर से राशन मिलने की उम्मीद के साथ सिमली बाजार आए। जब प्रशासन का कोई कर्मचारी राशन देने नहीं आया तो बच्चों के साथ खड़ीं मजदूर महिलाएं रो पड़ीं। उन्होंने कहा कि मजदूरी का काम बंद होने से रोजी रोटी का संकट हो गया है। अब प्रशासन भी हमारी सुध नहीं ले रहा।
सिमली बाजार के औद्योगिक क्षेत्र, पैट्रोल पपं बस्ती व न्यू मार्केट में नेपाल और बिहार के 30 लोग कई सालों से रह रहे हैं और मजदूरी, कारपेंटर, मिस्त्री, रंग-रोगन का काम कर घर चलाते हैं। कोरोना के कारण हुए लॉकडाउन से अब सभी कार्य बंद हो गए हैं और उनके समक्ष रोजी-रोटी का संकट खड़ा हो गया है। मजदूरों ने कहा कि जो राशन घर में था वो खत्म हो गया है। अब घरों में बच्चे भूख से बिलख रहे हैं। प्रशासन की ओर से उनको कोई मदद नहीं दी गई, जबकि सिमली बाजार में तीन बार बाहरी मजदूरों के नाम पर सरकारी राशन का आवंटन किया गया। क्षेपंस संदीप डिमरी, पूर्व प्रधान जयदीप गैरोला, दिनेश डिमरी सामाजिक कार्यकर्ता ने उनकी कुछ मदद की और प्रशासन से जल्द मजदूरों को राशन देने की मांग उठाई। तहसीलदार सोहन सिंह रांगड़ ने कहा कि अगर मजदूूर किसी ठेकेदार के साथ काम कर रहे होंगे तो उनकी जिम्मेदारी ठेकेदार की है। अगर ये ठेकेदार के साथ नहीं हैं तो प्रशासन उनको राशन देगा। जल्द उनको मदद दी जाएगी।