शराब की दुकान पूर्णा गांव में शिफ्ट करने की सूचना पर महिलाएं भड़क उठीं। इस पर महिलाओं का जत्था संभावित दुकान के मकान मालिक से वार्ता करने के लिए पूर्णा गांव पहुंच गया लेकिन मकान मालिक घर पर नहीं मिला।
इस पर महिलाओं ने मकान मालिक के परिजनों को किसी भी हालात में शराब की दुकान न खोले जाने का नोटिस दिया। इसके बाद वह ब्लाक मुख्यालय पहुंचीं और पुलिस चौकी का एक घंटे तक घेराव किया। पुलिस अधिकारियों के मकान मालिक को बुलाकर समझाने की बात पर वह शांत हुईं।
ब्लाक को शराब मुक्त बनाने की मांग को लेकर महिलाएं 23 दिनों से आंदोलनरत हैं। इस पर प्रशासन से 23 अप्रैल को शराब की दुकान को सील भी कर दिया था। इसके बाद भी महिलाओं का आंदोलन जारी था। रविवार को महिलाओं को सूचना लगी कि शराब की दुकान ब्लाक मुख्यालय से एक किमी दूर पूर्णा गांव में महेश राम के मकान पर शिफ्ट की जा रही है। इस पर महिलाएं पूर्णा गांव पहुंच गईं।
महेश राम के घर पर न मिलने के पर महिलाओं ने उसके परिजनों को दुकान किराए पर न देने का नोटिस दिया। साथ ही पुलिस चौकी पहुंचकर घेराव किया। चौकी प्रभारी एसएस बोर ने महिलाओं को बताया कि सोमवार को महेश राम को बुलाया गया है। पूर्णा गांव में शराब की दुकान नहीं खुलने दी जाएगी।
जिसके बाद महिलाएं धरनास्थल लौटी। प्रदर्शन करने वालों में ब्लाक प्रमुख उर्मिला बिष्ट, संघर्ष समिति के अध्यक्ष हीरा देवी पांगती, उपाध्यक्ष हिमांती बिष्ट, कोषाध्यक्ष कमला राणा, सचिव कलावती बिष्ट, लीला देवी, पुष्पा देवी, पुष्पा मिश्रा, खष्टी देवी, पार्वती देवी, तुलसी देवी, गंगा देवी, बचुली देवी, रेखा देवी, नंदी देवी, धर्मा देवी, शांति देवी, जशोदा देवी, हरमा देवी, लछुली देवी, गीता देवी, सरस्वती देवी आदि शामिल थी। दूसरी ओर कर्णप्रयाग में भी शराब बंदी को लेकर तहसील परिसर में महिलाओं और स्थानीय लोगों का धरना प्रदर्शन जारी रहा।