निजमूला घाटी के दूरस्थ पाणा भनाली गांव में दो दिन से प्रसव पीढ़ा से कराह रही एक महिला ने रविवार को अस्पताल लाते वक्त गांव से करीब आठ किमी दूर जंगल में ही बच्चे को जन्म दे दिया। जच्चा-बच्चा स्वस्थ होने पर परिजन उन्हें घर ले गए। घाटी के पाणा, ईराणी और झींझी गांव आज तक भी सड़क से नहीं जुड़ पाए हैं, जिससे मरीजों और गर्भवती महिलाओं को अस्पताल पहुंचाने में खासी दिक्कत झेलनी पड़ती है।
पाणा-भनाली गांव के मुकेश कुमार की पत्नी मीना (25) दो दिन से प्रसव पीढ़ा से कराह रही थी, तो ग्रामीण कंधे पर कुर्सी-डंडों के सहारे रविवार को उसे गोपेश्वर जिला अस्पताल में ला रहे थे। लेकिन गांव से करीब आठ किमी की दूरी पर जंगल में मीना देवी की प्रसव पीढ़ा बढ़ गई। उसके साथ चल रही आंगनबाड़ी कार्यकर्ता गुड्डी देवी व अन्य महिलाओं ने परिजनों को ढांढस बंधाया और मीना को जंगल में ही सुरक्षित प्रसव कराया। जच्चा-बच्चा स्वस्थ होने पर परिजन उन्हें घर ले आए।
युवक मंगल दल अध्यक्ष रणजीत कुमार, मखनी राम, गुड्डू राम, हिवाली देवी, जेठूली देवी, सूली देवी और गणेशी देवी का कहना है कि आज के दौर में जहां गांव-गांव सड़क से जुड़ गए हैं, लेकिन पाणा गांव आज भी सड़क के लिए तरस रहा है। ग्रामीणों को आज भी अपने गंतव्य को जाने के लिए दस किमी से अधिक दूरी तय करनी पड़ रही है। क्षेत्र में स्वास्थ्य सुविधा की भी कोई समुचित व्यवस्था नहीं है।