प्रशासन की लापरवाही के कारण कर्णप्रयाग में नगर के आठ बड़े नालों और होटलों की गंदगी को पिंडर व अलकनंदा नदियों में बहाया जा रहा है। नमामि गंगे अभियान के तहत नगर में सीवरेज टैंक बनने के बाद भी नालों का दूषित पानी नदियों में बहने व बैक्टीरिया पनपने से पिंडर नदी में पाई जाने वाली रोहू प्रजाति की मछली अस्तित्व खतरे में है।
कर्णप्रयाग नगर की आबादी 15 हजार से अधिक है। ऐसे में नगर की सफाई का जिम्मा नगर पालिका के पास है। अपर बाजार, बस स्टेशन, सुभाषनगर, शक्तिनगर, तहसील व आईटीआई कालोनी, सांकरीसेरा, देवतोली, पुजारी गांव आदि मोहल्लों के करीब 500 आवासीय भवनों के दूषित पानी की निकासी के लिए नगर पालिका ने कई नालियां बनाई हैं। उसके बाद उन सभी नालियों को आठ बड़े नालों के जरिये सीधे पिंडर व अलकनंदा नदी में छोड़ा है। देवगरी और संगम स्थल होने के कारण कर्णप्रयाग में पौड़ी, उत्तरकाशी, रुद्रप्रयाग जिलों के अलावा गोपेश्वर, जोशीमठ, गैरसैंण, आदिबदरी, पोखरी क्षेत्रों के गांवों से देवी देवता संगम पर स्नान के लिए आते हैं। जीव विज्ञान के जानकारों का कहना है कि दूषित पानी से पिंडर नदी में पाई जाने वाली रोहू प्रजाति की मछली के अस्तित्व पर संकट गहरा रहा है। गंदगी से पिंडर से रोहू मछली सहित अन्य जलीय जंतु लगभग खत्म होने से नदी में जहरीले बैक्टीरिया पनप रहे हैं। कर्णप्रयाग के अलावा सिमली, बगोली, नौली, नारायणबगड़, थराली और देवाल के नालों का दूषित पानी भी पिंडर नदी में बहाया जा रहा है।
कोट
अलकनंदा व पिंडर नदियों में गंदगी डालने पर पूर्व में नगर पालिका को फटकार लगाई गई थी। नमामि गंगे के तहत नालों का दूषित पानी नदियों में जाने से रोकने के लिए नदी किनारों पर सीवरेज टैंक बनाए गए हैं। फिर भी दूषित पानी अगर नदियों में जा रहा है तो संबंधित विभाग के अधिकारियों को सख्त निर्देश दिए जाएंगे। - देवानंद शर्मा, एसडीएम कर्णप्रयाग।