देवसारी जल विद्युत परियोजना से प्रभावित पिंडर के 16 गांवों के लोगों ने बिना सहमति के ग्रामीणों की भूमि अधिग्रहण किए जाने का विरोध किया। पूर्णा के ग्रामीणों और देवसारी-सोड़िग संघर्ष समिति ने इस संबंध में डीएम को ज्ञापन भेजा और मामले में कार्रवाई की मांग की। ग्रामीणों ने कहा कि परियोजना के तहत 491 परिवार प्रभावित होंगे। सतलुज जल विद्युत निगम की ओर से तहसील के माध्यम से परियोजना के प्रभावितों की बैंक खाता संख्या और आधार कार्ड मांगा गया है।
सतलुज जल विद्युत निगम की ओर से पिंडर नदी पर 252 मेगावाट की परियोजना प्रस्तावित है। परियोजना से सरकोट, सोड़िंग, मोड़ा चकपदमल्ला, पदमल्ला, तलौर, ईच्छोली, सेलखेला, कैल, देवसारी, पूर्णा, थराली, चेपड़ू, पैनगढ, गड़कोट, साहूगांव, सोनाला गांव के 491 परिवार प्रभावित होंगे। इनमें से 26 परिवार ऐसे हैं जिनकी भूमि और मकान दोनों जाएंगे और 465 वे हैं जिनकी सिर्फ भूमि जाएगी। इन दिनों प्रभावितों की जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया चल रही है। सतलुज की ओर से तहसील प्रशासन के माध्यम से प्रभावितों की बैंक खाता संख्या और आधार कार्ड मांगा गया है। पूर्णा के ग्राम प्रधान मनोज कुमार, देवसारी-सोड़िग संघर्ष समिति के अध्यक्ष प्रदीप कठैत, पूर्व प्रमुख डीडी कुनियाल, हरेंद्र बिष्ट, पुष्कर बिष्ट, कुंदन परिहार, नंदन सिंह, चंदन कठैत, प्रताप सिंह, विक्रम सिंह, मुन्ना कठैत, गोविंद सिंह आदि ने डीएम को दिए ज्ञापन में जबरन भूमि अधिग्रहण करने का विरोध किया। प्रभावितों ने आरोप लगाया कि सतलुज निगम की ओर से लगातार लोगों को गुमराह किया जा रहा है। प्रभावितों की सहमति लिए बिना जबरन भूमि अधिग्रहण की कार्रवाई की जा रही है, जिससे प्रभावितों में रोष है। तहसीलदार एसएस रांगड़ से बताया कि सतलुज निगम की ओर से देवसारी जल विद्युत परियोजना के लिए भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया चल रही है। भूमि के मुआवजे के लिए प्रभावितों के आधार व बैंक खाता नंबर मांगे गए हैं।