नहर के निरीक्षण को दशोली विकास खंड के मासौं गांव में गए सिंचाई विभाग के अधिकारियों को ग्रामीणों का विरोध झेलना पड़ा।
अधिकारियों पर करोड़ों रुपये की फिजूलखर्ची का आरोप लगाते हुए ग्रामीणों ने सुधारीकरण कार्य रुकवाकर निर्माण कार्य की जांच करने की मांग की।
सोमवार को ग्रामीणों ने निरीक्षण के लिए पहुंचे सहायक अभियंता और कर्मचारियों का घेराव किया। ग्रामीणों के बढ़ते विरोध को देख सहायक अभियंता अतुल पांडे ने कार्य रुकवा दिया।
स्थानीय निवासी उमा देवी, सुमति देवी और आनंद सिंह ने बताया कि वर्ष 1991 में सरकार की ओर से कश्तकारी के लिए सिंचाई नहर का निर्माण किया गया था, लेकिन निर्माण पूर्ण होने के बाद से नहर में पानी नहीं चल पाया है।
कहा कि विभाग प्रतिवर्ष नहर सुधारीकरण के नाम पर लाखों की धनराशि खर्च करता है, लेकिन अभी भी नहर से खेतों तक पानी नहीं पहुंच पाया है।
बताया कि हाल में विभाग द्वारा 42 लाख की लागत से नहर का सुधारीकरण कार्य किया जा रहा है।
ग्रामीणों का कहना है कि अगर विभाग ने शीघ्र नहर को सुचारु नहीं किया तो ग्रामीण आंदोलन शुरू कर देंगे। इधर, विभाग के सहायक अभियंता का कहना है कि सुधारीकरण कार्य में गुणवत्ता की अनदेखी पाई गई है।
जिसके लिये ठेकेदार के विरुद्घ कार्रवाई की जाएगी। आवश्यकता हुई तो ठेकेदार को ब्लैक लिस्टेड करने के लिये उच्चाधिकारियों को लिखा जाएगा।