मलारी हाईवे पर तीसरे दिन भी वाहनों की आवाजाही शुरू नहीं हो पाई जिससे सीमांत क्षेत्र के ग्रामीणों और सेना के जवानों को भारी परेशानी उठानी पड़ रही है। ग्रामीण शीतकालीन प्रवास के लिए भी नहीं निकल पा रहे हैं।
मलारी हाईवे सोमवार को सलधार के पास भारी मलबा आने से अवरुद्ध हो गया था जिसे बुधवार तक खोला नहीं जा सका है। बीआरओ की ओर से हाईवे खोलने का काम किया जा रहा है। मगर लगातार मलबा आने से हाईवे खोलने में काफी समय लग रहा है। हाईवे बंद होने से क्षेत्रीय लोगों को जान जोखिम में डालकर हाईवे को पार करना पड़ रहा है। क्षेत्र के ग्रामीण लापसा मेले के बाद शीतकालीन प्रवास की ओर लौटना शुरू कर देते हैं। ज्यादातर लोग पालतू पशुओं और सामानों के साथ पैदल ही चलते हैं अपने पड़ावों में समय पर पहुंच सकें इसके लिए वह इन दिनों आने शुरू हो जाते हैं। लेकिन अभी यहां हाईवे बंद है, ग्रामीण सड़क खुलने का इंतजार कर रहे हैं।
पागल नाला में मलबे के ढेर से गुजर रहे वाहन
बदरीनाथ हाईवे पर पागल नाला में मलबे के ढेर के ऊपर से वाहनों की आवाजाही हो रही है। यहां नाले में भारी मात्रा में मलबा अटका हुआ है। बदरीनाथ धाम की यात्रा के लिए तीर्थयात्रियों को लेकर आ रही बसें अक्सर यहां फंस रही हैं, जिससे घंटों जाम की समस्या हो रही है। पागल नाला के मलबे से यहां टंगणी गांव के ग्रामीणों के खेत भी भूस्खलन की चपेट में आ गए हैं।
बदरीनाथ हाईवे पर पागल नाला हर यात्रा सीजन में सिरदर्द बना रहता है। इस वर्ष भी बरसात में यहां भारी मात्रा में बोल्डर और मलबा हाईवे पर आया है। एनएचआईडीसीएल (राष्ट्रीय राजमार्ग एवं ढांचागत विकास) की ओर से हाईवे पर मलबे का समतलीकरण कर वाहनों की आवाजाही सुचारु करवाई गई लेकिन मलबा पूरी तरह से नहीं हटाया गया है। ऐसे में यहां पर मलबे के ऊपर ही वाहनों की आवाजाही होने से कई वाहन फंस रहे हैं जिससे जाम की स्थिति पैदा हो रही है। इधर, एनएचआईडीसीएल के डीजीएम आरके श्रीवास्तव का कहना है कि पागलनाला में मोटर पुल का निर्माण प्रस्तावित है। इसका प्रस्ताव केंद्र सरकार को भेजा गया है जल्द ही यहां पुल निर्माण की प्रक्रिया शुरू कर दी जाएगी।
यमुनोत्री हाईवे के गड्ढे बने आवाजाही में जोखिम
यमुनोत्री हाईवे के गड्ढों के कारण वाहन सवारों के लिए आवाजाही जोखिम भरी साबित हो रही है। कई जगहों पर श्रद्धालुओं और स्थानीय लोगों को वाहनों से उतरकर आना जाना पड़ रहा है। फूलचट्टी के पास बदहाल हाईवे से वाहन क्षतिग्रस्त हो रहे हैं। इसी तरह करीब 45 गावों की लाइफ लाइन बड़कोट तिलाड़ी सड़क के बुरे हाल हैं। यमुनोत्री मंदिर समिति के सचिव सुरेश उनियाल, मनमोहन उनियाल, गजेंद्र उनियाल, सुरेंद्र सिंह, जिला पंचायत सदस्य पवन पंवार, धनवीर रावत का कहना है कि हाईवे के साथ ही जिला, संपर्क मार्गों की बदहाली से श्रद्धालुओं के साथ स्थानीय लोग परेशान हैं।