विश्व धरोहर फूलों की घाटी में विभिन्न प्रजाति के फूलों का खिलना शुरू हो गया है। घाटी के प्रवेश द्वार से ही फूल खिले हुए हैं। घाटी के निरीक्षण के लिए गया नंदा देवी राष्ट्रीय पार्क का पांच सदस्यीय दल रेंज कार्यालय गोविंदघाट लौट आया है। दल ने बताया कि घाटी में अभी लगभग दो फीट तक बर्फ जमी हुई है। यहां दुर्लभ वन्य जीवों की सुरक्षा को देखते हुए पार्क प्रशासन की ओर से लगाए गए ट्रैप कैमरों को भी दल के सदस्य अपने साथ लेकर आ गए हैं।
फूलों की घाटी प्रतिवर्ष एक जून को पर्यटकों के लिए खोल दी जाती है। पिछले दो सालों से कोरोना संक्रमण को देखते हुए घाटी में पर्यटकों की संख्या में भारी गिरावट रही है। इस वर्ष अभी तक घाटी को खोलने या न खोलने का आदेश पार्क प्रशासन को नहीं मिला है। तीन दिनों से घाटी के निरीक्षण के लिए गई पार्क प्रशासन की टीम रेंज कार्यालय गोविंदघाट लौट आई है। घाटी के वन क्षेत्राधिकारी बृजमोहन भारती ने बताया कि घाटी में दो फीट तक बर्फ जमी है। जिन स्थानों पर बर्फ पिघल गई है, वहां फूल खिलने शुरू हो गए हैं। बताया कि घाटी में कई दुर्लभ प्रजाति के वन्य जीव भी शीतकाल में विचरण करते हैं और वन्य जीवों की सुरक्षा को देखते हुए घाटी में ट्रैप कैमरे लगाए जाते हैं। इन कैमरों को भी गोविंदघाट लाया गया है। टीम में अनूप कुमार, मनमोहन भंडारी, जय प्रकाश, राजेंद्र सिंह, मकर सिंह राणा मौजूद थे।
500 प्रजाति के खिलते हैं फूल
- फूलों की घाटी में लगभग 500 प्रजाति के फूल खिलते हैं। सितंबर में यहां ब्रह्मकमल खिलते हैं, जो पर्यटकों को आकर्षित करते हैं। फूलों की घाटी के भ्रमण के लिए जुलाई, अगस्त व सितंबर के महीनों को सर्वोत्तम माना जाता है। 15 जुलाई से 15 अगस्त तक घाटी चारों ओर से फूलों से भरी रहती है।