लोकतंत्र में सदन की अहमियत केवल कानून बनाने तक सीमित नहीं है, बल्कि जनहित के मुद्दों पर चर्चा और सरकार की जवाबदेही तय करने में भी है। उत्तराखंड की विधानसभाओं के आंकड़े बताते हैं कि सदन की कार्यवाही के दिन समय के साथ कम होते गए हैं।
उत्तराखंड में पांचवीं विधानसभा का आखिरी सत्र बुधवार को संपन्न हो गया। पांचों विधानसभाओं में कुल कार्यकाल की अवधि देखें तो दूसरी सरकार में सर्वाधिक 105 दिन सदन की कार्यवाही चली थी।विधानसभा की कार्य संचालन नियमावली के तहत एक वर्ष में कम से कम 60 दिन विधानसभा का सत्र चलना चाहिए। पुराने आंकड़े देखें तो तस्वीर साफ होती नजर आ रही है।
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पहली सरकार में 2002 से 2007 के बीच प्रतिवर्ष सदन संचालन के दिनों का औसत 16.6 दिन का रहा। दूसरी सरकार में 2007 से 2012 के बीच का औसत प्रतिवर्ष 21 दिन का रहा। तीसरी सरकार में वर्ष 2012 से 2017 तक सदन की कार्यवाही का औसत प्रति वर्ष 14.4 दिन रहा।
चौथी सरकार में वर्ष 2017 से 2022 के बीच सदन की कार्यवाही का औसत प्रति वर्ष 12.2 दिन रहा। पांचवीं सरकार में वर्ष 2022 से 2026 तक सदन की कार्यवाही का औसत प्रतिवर्ष 9 दिन का रहा। पांचवीं सरकार में 2022 में आठ दिन (मार्च में नई विधानसभा गठन, अध्यक्ष चुनाव दो दिन, जून में बजट का चार दिन, नवंबर में अनुपूरक बजट दो दिन), 2023 में 10 दिन (बजट सत्र चार दिन, मानसून सत्र छह दिन), 2024 में 10 दिन (यूसीसी पर विशेष सत्र तीन दिन, बजट सत्र चार दिन, अनुपूरक बजट तीन दिन), 2025 में 10 दिन (बजट सत्र पांच दिन, मानसून सत्र दो दिन, विशेष सत्र तीन दिन) और 2026 में सात दिन (बजट सत्र पांच दिन, अनुपूरक बजट दो दिन) सदन की कार्यवाही चली।