कर्णप्रयाग। डाॅ. शिवानंद नौटियाल राजकीय स्नात्तकोत्तर महाविद्यालय में भारतीय दार्शनिक अनुसंधान परिषद की ओर से आयोजित दो दिवसीय सेमीनार शनिवार को संपन्न हो गया है। सेमीनार में देश के विभिन्न क्षेत्रों के 60 शोधार्थियों ने ऑनलाइन और ऑफलाइन माध्यम से अपने शोध पत्रों का वाचन किया। कार्यक्रम में मुख्य वक्ता डाॅ. शिक्षा सेमवाल ने कहा कि प्राचीन और मध्यकालीन भारत हर दृृष्टि से आत्मनिर्भर था। उन्होंने कहा कि सतत विकास के माध्यम से ही आत्मनिर्भर भारत आगे बढ़ सकता है। प्राचार्य प्रो. राम अवतार सिंह ने कहा कि दो दिवसीय संगोष्ठी के में शोधार्थियों की ओर से उल्लिखित शोध पत्र आत्मनिर्भर भारत के विकास की नींव का पत्थर साबित होगा। डाॅ. मृगांक मलासी ने कहा कि मीडिया के माध्यम से सभी शोध पत्रों को प्रचारित और प्रसारित किया जाएगा। डाॅ. वीआर अंथवाल के संचालन में आयोजित सेमिनार में डाॅ. एमएस कंडारी, डाॅ. आरसी भट्ट, डाॅ. चंद्र मोहन आदि मौजूद थे। संवाद