यात्रा मार्ग पर सुरक्षा को लेकर किए जा रहे दावों की जिले में दो दिनों की बारिश ने पोल खोल दी है। जिला प्रशासन यात्रा मार्ग पर यात्रियों की कुशलता और संख्या की सही जानकारी तक नहीं दे पा रहा है। पाखी में स्थापित किए गए
बायोमैट्रिक रजिस्ट्रेशन को भी बंद कर पांडुकेश्वर में स्थापित किया गया है, जिससे कई तीर्थयात्री बिना रजिस्ट्रेशन के ही बदरीनाथ और हेमकुुंड साहिब पहुंच गए। इनका जिला प्रशासन के पास कोई डाटा तक नहीं है।
बीती बृहस्पतिवार को हुई मूसलाधार बारिश के बीच बदरीनाथ, जोशीमठ, गोविंदघाट, घांघरिया, हेमकुंड साहिब, हनुमान
चट्टी और पांडुकेश्वर में फंसे तीर्थयात्रियों की जिला आपदा कंट्रोल रूम सही जानकारी नहीं दे पाया। वर्ष 2013 में आई जल प्रलय में मृत लोगों की सही जानकारी नहीं मिल पाई थी। इसके बाद सरकार ने राज्य के किसी भी धाम की यात्रा पर जाने वाले तीर्थयात्री की संख्या के बारे में जानकारी के लिए बायोमैट्रिक रजिस्ट्रेशन करवाने का निर्णय लिया था। यात्रा शुरू होने के साथ ही बायोमैट्रिक रजिस्ट्रेशन भी हवा हो गया।
अब बृहस्पतिवार को हुई मूसलाधार बारिश के बाद ये पता नहीं चल पा रहा है कि कितने यात्री कहां रुके हैं और कितने फंसे रहे। प्रशासन जोशीमठ में मात्र 600 तीर्थयात्रियों के रुकने की बात कह रहा था, वहीं स्थानीय लोगों के अनुसार जोशीमठ में करीब 2000 से अधिक तीर्थयात्री रुके थे।
वहीं जिले में बायोमैट्रिक रजिस्ट्रेशन का कार्य देख रहे पर्यटन अधिकारी सोबत सिंह राणा का कहना है कि कई तीर्थयात्री बिना पंजीकरण के ही जबरदस्ती बदरीनाथ जा रहे हैं। पाखी में रजिस्ट्रेशन का कार्य बंद कर पांडुकेश्वर से बायोमेट्रिक रजिस्ट्रेशन कार्य किया जा रहा है। कोशिश की जा रही है कि बदरीनाथ और हेमकुंड साहिब जाने वाले हर तीर्थयात्री का रजिस्ट्रेशन किया जाए।