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गदेरे पर बनी पुलिया से जान जोखिम में डालकर कर रहे आवाजाही

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वर्ष 2013 में आई आपदा के छह साल बाद भी तहसील थराली के गांवों के हालात नहीं सुधरे हैं। स्थिति यह है कि सोल घाटी के नौ गांवों को जोड़ने वाला ढाढरबगड़ पैदल पुल आज तक नहीं बना है, जिससे पांच हजार की आबादी गदेरे पर बनी लकड़ी की अस्थायी पुलिया से जान जोखिम में डालकर आवाजाही करने को मजबूर हैं।
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वर्ष 2013 में ढाढरबगड़ गदेरा में बाढ़ आने से रणकोट, घूंघूटी, गेराड़ी, चौनी, हरिनगर लेटाल, कलचूना, पारथा और कुराड़आई गांवों का एकमात्र ढाढरबगड़ पुल बह गया था। तब से यहां स्थायी पुल नहीं बन पाया है। ग्रामीणों ने यहां स्वयं के प्रयासों से अस्थायी पुलिया का निर्माण किया, लेकिन गदेरे में उफान आने से यहां आवाजाही में खतरा बना रहता है। गदेरा उफान पर आने से यह पुलिया भी अक्सर बह जाती है। ढाढरबगड़ गदेरे को पार कर इन गांवों के बच्चे गेरूड़ इंटर कॉलेज जाते हैं। भवान सिंह, खिलाप सिंह, सुजान सिंह, दिलमणि, खीम सिंह, दयाल सिंह, चंद्र सिंह आदि ने कहा कि इस संबंध में कई बार सीएम, डीएम, एसडीएम, लोनिवि, जिला पंचायत अध्यक्ष से यहां स्थायी पुल के निर्माण की मांग की लेकिन कोई भी उनकी पीड़ा सुनने को तैयार नहीं है। वहीं, लोक निर्माण विभाग के अधिशासी अभियंता जगदीश रावत का कहना है कि पहले यह पुल जिला पंचायत का था जो बह गया। उसके बाद यहां पर स्पान अधिक होने से ग्रामीणों ने लोनिवि को पुल बनाने को कहा। विभाग की ओर से पुल का इस्टीमेट शासन को भेजा गया है। जैसे ही इस्टीमेट स्वीकृत होगा पुल निर्माण का कार्य शुरू किया जाएगा।
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