पर्वतीय क्षेत्रों में परिवहन की समुचित सुविधा नहीं होने से लोगों को मीलों दूरी पैदल आवाजाही करनी पड़ रही है। कई सड़कें तो ऐसी हैं जिनका निर्माण तो राज्य निर्माण से भी पहले हो चुका है, लेकिन इन पर आज तक रोडवेज बस का संचालन नहीं हो पाया है। अगर इन सड़कों पर बसों का संचालन हो तो, पर्यटक और तीर्थयात्री भी छिपे पर्यटन स्थल और प्राचीन मठ-मंदिरों का दीदार कर सकेंगे।
यह बातें बाल भवन गोपेश्वर में आयोजित अमर उजाला के संवाद कार्यक्रम में शहर के गणमान्य लोगों ने कही। बाल भवन के निदेशक विनोद रावत ने कहा कि जिला मुख्यालय के समीप के गांवों की सड़कें बदहाल स्थिति में हैं। सरकार करोड़ों रुपये खर्च कर गांव-गांव को यातायात से जोड़ने का काम कर रही है, लेकिन कार्यदायी संस्थाएं सड़कों के निर्माण में गुणवत्ता पर ध्यान नहीं दे रही हैं। जिला मुख्यालय पर ही सड़कों की दुर्दशा है। व्यापारी पम्मी पंत ने कहा कि नगर क्षेत्र में पेयजल की व्यवस्था पर विशेष ध्यान देने की जरूरत है। साल दर साल बीमारियां बढ़ रही हैं। कई बीमारियां दूषित पानी से पनप रही हैं। यह सब देखते हुए भी जल निगम की ओर से पेयजल लाइनों पर फिल्टर की व्यवस्था नहीं की जा रही है। जबकि यह एक गंभीर समस्या है।
रमेश गड़िया ने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में वर्षों पूर्व बनीं सड़कें आज तक बसों के संचालन के लिए फिट नहीं हैं। स्थिति यह है कि उत्तराखंड राज्य निर्माण से पूर्व निर्मित सड़कों पर भी आज तक बस सेवा शुरू नहीं हो पाई है। जिससे ग्रामीणों को महंगा किराया चुकाकर अन्य सार्वजनिक वाहनों से आवाजाही करनी पड़ रही है। ऐसे में परिवहन विभाग और कार्यदायी संस्थाओं को सड़कों का संयुक्त सर्वेक्षण करना चाहिए। कार्यक्रम के दौरान भरत सिंह कठैत, दीपक कुमार, सुरेंद्र सिंह, मनोज रावत, केके सेमवाल, हुमक सिंह ने भी अपने विचार रखे।