नाखोली के ग्रामीण बोले, जल्द सड़क नहीं बनी तो उग्र करेंगे आंदोलन
सड़क न होने पर रविवार को बीमार को डंडी के सहारे आठ किमी पैदल पहुंचाया था अस्पताल तक
संवाद न्यूज एजेंसी
नारायणबगड़। ब्लॉक के नाखोली गांव में सड़क न होने पर रविवार को ग्रामीणों ने बीमार बुजुर्ग को डंडी के सहारे आठ किमी पैदल अस्पताल पहुंचाया था। स्वास्थ्य सुविधा न होने से नाराज नाखोली गांव के ग्रामीणों ने सोमवार को तहसील मुख्यालय पर प्रदर्शन किया। ग्रामीणों ने कहा यदि जल्द उनके गांव के लिए सड़क नहीं बनी तो उग्र आंदोलन करने के लिए बाध्य होंगे।
सोमवार को नाखोली के ग्रामीण तहसील मुख्यालय पहुंचे और परखाल तिराहे से जुलूस निकाला जो जीतसिंह मार्केट, बस स्टैंड से होते हुए एक किलोमीटर दूर तहसील कार्यालय पंती तक पहुंचा। यहां ग्रामीणों ने शासन/प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी की। तहसील कार्यालय परिसर में हुई जनसभा में कांग्रेस नेता नरेंद्र सिंह रावत ने कहा कि उत्तराखंड राज्य बने 25 वर्ष हो गए हैं लेकिन आज भी लोगों को सड़क के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है। कहा कि नाखोली के लिए वर्ष 2018 में तीन किमी सड़क की स्वीकृति मिली लेकिन आज तक निर्माण नहीं हो पाया। निवर्तमान प्रधान/प्रशासक शकुंतला देवी ने कहा कि सड़क के अभाव में महिलाओं को रोजमर्रा की जिंदगी में कई तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ता है। यदि जल्द सड़क का निर्माण शुरू नहीं कराया गया तो उग्र आंदोलन किया जाएगा। सभा को ममंद अध्यक्ष यशोदा देवी, श्याम सिंह, सुरेंद्र गुसांई, भूपेंद्र सिंह, कर्ण सिंह, जयवीर सिंह आदि ने संबोधित किया। इसके बाद ग्रामीणों ने तहसीलदार दिगंबर नेगी के माध्यम से मुख्यमंत्री को ज्ञापन भेजा। तहसीलदार दिगंबर नेगी ने कहा कि मांग पर आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।
25 किमी सड़क के इंतजार में बीते दस साल
स्वीकृति के बाद भी नहीं बन सकी धुरधारकोट-वाक-पिनाऊं सड़क
संवाद न्यूज एजेंसी
देवाल। धुरा धारकोट-वाक-पिनाऊं सड़क निर्माण की मांग को लेकर रूपकुंड पर्यटन विकास समिति व क्षेत्र के ग्रामीणों ने लोनिवि मंत्री सतपाल महाराज को ज्ञापन भेजा। समिति के पदाधिकारियों ने कहा कि गांव के लिए वर्ष 2015 में सड़क स्वीकृत हो चुकी है लेकिन अब तक निर्माण कार्य शुरू नहीं हुआ। 25 किमी यह सड़क बन जाए तो करीब 10 हजार की आबादी को इसका लाभ मिले। समिति ने मामले में कार्रवाई नहीं होने पर आंदोलन की चेतावनी दी।
रूपकुंड पर्यटन विकास संघर्ष समिति के अध्यक्ष इंद्र सिंह राणा, खड़क सिंह, रणजीत सिंह, गुड्डू दानू, कुंवर राम, दीवान सिंह, महिपाल सिंह, शेर सिंह, महेशी देवी और गीता आदि ने बताया कि बगड़ीगाड़-धुरा धारकोट-वाक-पिनाऊं सड़क की वर्ष 2015 में प्रथम चरण की स्वीकृति मिली लेकिन यह सड़क दस साल में भी नहीं बन पाई। कहा कि इस 25 किमी सड़क के बनने से धुरा धारकोट, वाक, पिनाऊं, कुलिंग, वाण, सुया, दीदना समेत दस किमी से कम दूरी के कई गांव इस सड़क से जुड़ेंगे और दस हजार से अधिक की आबादी को लाभ मिलेगा। मगर कुछ लोगों की ओर से सड़क को बलाण से ले जाने का प्रयास किया जा रहा है। कहा कि अगर इस सड़क को बगड़ीगाड़- धुराधारकोट के बजाय बलाण से बनाया गया तो इस क्षेत्र की जनता आंदोलन के लिए बाध्य होगी। वहीं लोनिवि के ईई दिनेश मोहन गुप्ता का कहना है कि अभी सड़क वन अधिनियम की स्वीकृति के लिए प्रक्रियाधीन है।