बर्फबारी के बाद से रुकी नीती घाटी के बर्फानी बाबा की यात्रा फिर से शुरू हो गई है। हालांकि एसडीआरएफ ने मलारी से नीती घाटी तक बर्फ हटा दी है लेकिन मलारी हाईवे की स्थिति बर्फबारी के कारण बेहद खतरनाक बनी है। यहां बर्फ में वाहनों के टायर फिसल रहे हैं। ऐसे में एसडीआरएफ के जवान श्रद्धालुओं के वाहनों की सुरक्षित आवाजाही करवा रहे हैं।
सात अप्रैल को बर्फानी बाबा की यात्रा शुरू हुई थी, लेकिन एक दिन बाद आठ अप्रैल को नीती घाटी में बर्फबारी के कारण यात्रा रुक गई थी। एसडीआरएफ की टीम ने मलारी से नीती तक सड़क से बर्फ हटाने का काम शुरू किया। चार दिनों तक बर्फ हटाने के बाद सोमवार से दोबारा यात्रा शुरू हो गई है। अभी स्थानीय श्रद्धालु ही बाबा के दर्शनों के लिए पहुंच रहे हैं।
गोपेश्वर के अर्जुन नेगी का कहना है कि बाबा बर्फानी के दर्शन करने के साथ ही नीती घाटी के नैसर्गिक सौंदर्य का लुत्फ भी उठाया। एसडीआरएफ के इंस्पेक्टर हरक सिंह राणा का कहना है कि मलारी हाईवे से बर्फ तो हटा ली गई है, लेकिन कई जगहों पर वाहनों की आवाजाही बमुश्किल से हो रही है। कुछ दिनों तक मौसम खुला रहा तो हाईवे पर आवाजाही आसानी से होने लगेगी।
10 फीट ऊंचे शिवलिंग के दर्शन को लोगों में उत्साह
बर्फ के बीच 10 फीट ऊंचा शिवलिंग के दर्शन करने को लोगों को खासा उत्साह है। यह यात्रा आगामी 30 अप्रैल तक चलेगी। चमोली के जोशीमठ ब्लॉक की नीति घाटी के अंतिम गांव से करीब एक किलोमीटर पहले टिंमरसैंण में पहाड़ी पर स्थित गुफा के अंदर प्राकृतिक रूप से हिम शिवलिंग विराजमान हैं। इस पर पहाड़ी से टपकने वाले जल से हमेशा अभिषेक होता रहता है। इसी शिवलिंग के पास बर्फ पिघलने के दौरान प्रतिवर्ष बर्फ शिवलिंग का आकार लेता है। जिसे बर्फानी बाबा या टिंमरसैंण महादेव के नाम से जाना जाता है।
पर्यटन मंत्री सतपाल महाराज ने कहा कि उत्तराखंड के सीमांत जनपद चमोली की नीति घाटी स्थित टिंमरसैंण में बाबा बर्फानी एक स्वयंभू शिवलिंग के रूप में विराजमान है। हर साल शीतकाल में बर्फ से 10 फीट से ऊंचा शिवलिंग बनता है। इस जगह पर भगवान शिव ने अपनी कैलाश यात्रा के दौरान रात्रि विश्राम किया था। इसलिए यह जगह सौसा महादेव के नाम से विख्यात है। अब श्रद्धालुओं को प्रतिबंधित क्षेत्र नीति घाटी जाने के लिए अनुमति लेने की जरूरत नहीं होगी। जिससे अब श्रद्धालु आसानी से टिंमरसैंण महादेव की यात्रा कर भगवान शिव के दर्शन कर सकते हैं।