कर्णप्रयाग। डिम्मर के ग्रामीणों ने मां उमा को पौराणिक परंपराओं के अनुसार वस्त्र, आभूषण और आल कलेऊ अर्पित किया। डिम्मर गांव मां उमा का मायका माना जाता है। यहां के ग्रामीण हर वर्ष ज्येष्ठ माह की संक्रांति को मां उमा को आल कलेऊ भेंट करते हैं।
बुधवार सुबह ज्येष्ठ माह की संक्रांति पर डिम्मर गांव में पूजा की गई। इसके बाद अपनी ध्याण मां उमा देवी को अर्पित करने के लिए ग्रामीणों ने नए अनाज का भोग, रोट, मालपुवे, चूड़ा, भुजौला एवं मिठाई आदि पकवान तैयार किए। दोपहर को ग्रामीण सभी पकवान लेकर मां उमा देवी मंदिर पहुंचे और उनके मायके डिम्मर से लाया गया आल कलेऊ, फल, वस्त्र और आभूषण अर्पित किए। पुजारी नरेश पुजारी ने बताया कि पौराणिक काल से ही मां उमा देवी को आल कलेऊ भेंट करने की परंपरा है। इस दौरान आचार्य सत्य प्रसाद खंडूड़ी, डाॅ. गौरव डिमरी, गणेश खंडूड़ी, शशिकांत डिमरी, रविंद्र पुजारी, राजेंद्र पुजारी, कांति पुजारी और राधाकृष्ण पुजारी आदि मौजूद थे। संवाद