बंगाली गांव से विदा होकर ससुराल क्षेत्र के लिए प्रस्थान करती मां नंदा।
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मां नंदा सोमवार को अपने ससुराल गेरुड़ गांव पहुंची। मायके में नम आंखों से नंदा भक्तों ने अपनी आराध्य मां को ससुराल के लिए विदा किया। मां नंदा की लोकजात यात्रा कैलास के नजदीक पहुंच गई है। बंगाली गांव (मायका पक्ष) के ग्रामीण मां को विदा करने के लिए करीब बीस किमी पैदल चले। इस दौरान महिलाएं मां नंदा की डोली से लिपटकर रो पड़ी। इन मार्मिक क्षणों को देख वहां मौजूद हर भक्त की आंखें नम हुई।
बंगाली गांव की प्रधान दीपा देवी, सावित्री देवी, मुन्नी देवी, विमला देवी, दिनेश सिंह, राजे सिंह, मनोहर सिंह, कल्याण सिंह, सुरेंद्र सिंह, पुष्कर सिंह और रघुवीर सिंह का कहना है यात्रा को क्षेत्र में प्रतिवर्ष धूमधाम के साथ आयोजित किया जाता है। कहा कि इस वर्ष आपदा से क्षतिग्रस्त पड़े पैदल रास्तों से यात्रा का संचालन करना मुश्किल रहा। शाम पांच बजे मां नंदा अपने ससुराल (कैलास) गेरुड़ पहुंची। मंगलवार को यात्रा बुरसोल गांव होते हुए बूंगा गांव पहुंचेगी।
वहीं, दशोली की मां नंदा कुंडबगड़ गांव से होते हुए रात्रि प्रवास के लिए लुंतरा गांव पहुंची। यहां मां के आगमन पर महिलाओं ने मांगल गीत गाए। इस मौके पर महिपाल सिंह, लखपत सिंह, श्याम सिंह, मकर सिंह, शकुंतला देवी, विमला देवी, गोदंाबरी देवी, मंगसीरी देवी, भादुली देवी आदि मौजूद थे।