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Chamoli News: गर्भ गृह से बाहर आई मां देवराड़ी देवी की मूर्ति

Wed, 04 Dec 2024 08:16 PM IST
देहरादून ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, चमोली
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नारायणबगड़ के स्वान तल्ला में आयोजित पांडव नृत्य में गैंडा वध का मंचन करते देवताओ के पश्वा। स्र
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डोली अब छह माह तक करेगी भ्रमण, मंदिर परिसर में हुआ देव नृत्य
संवाद न्यूज एजेंसी
कर्णप्रयाग। रानीगढ़ पट्टी के देवल गांव की आराध्य मां देवराड़ी देवी की मूर्ति बुधवार को गर्भगृह से बाहर लाई गई। इस दौरान मंदिर परिसर में देव नृत्य हुआ। अब छह माह तक देवी की डोली विभिन्न गांवों का भ्रमण करेगी। देवराड़ी देवी की यह भ्रमण यात्रा 12 साल बाद हो रही है।
बुधवार को देवल गांव के पौराणिक देवराड़ी देवी मंदिर में आचार्य शक्ति प्रसाद देवली, नरेश देवली, हर्षपति देवली, संजय देवली ने तीन दिवसीय धार्मिक अनुष्ठान संपन्न करवाया। दोपहर 12.30 बजे मां देवराड़ी देवी की डोली, लाटू, हीत और सिंहलास देवताओं के निशान मंदिर के गर्भगृह से बाहर लाए गए। इस दौरान देवी-देवताओं के पश्वाओं ने देवनृत्य कर मंदिर की परिक्रमा की। देवी के ऐरवालों ने ढोल-दमाऊं की थाप पर नृत्य किया। इसके बाद डोली और निशान मैतोली तोक (बनातोली) माता देवराड़ी के खेत में रात्रि प्रवास के लिए पहुंचे। यहां पुजारियों ने देवी की पूजा कर भोग लगाया। मनोरमा देवली, प्रभा देवी, सुलोचना देवी, विमला देवी समेत कई महिलाओं ने मांगल गीत गाए। इस मौके पर बन्याथ यात्रा समिति के अध्यक्ष उमेद सिंह चौधरी, सचिव प्रेम चंद्र देवली, विधायक अनिल नौटियाल, राजपाल चौधरी, विक्रम चौधरी, नारायण सिंह, प्रदीप राणा, कमलेश देवली आदि मौजूद रहे।
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अनाचार को खत्म करे के लिए दुर्गा ने लिए अवतार
कर्णप्रयाग। नंदाधाम नौटी के उफराई देवी मंदिर परिसर में आयोजित श्रीमद् देवी भागवत कथा के तीसरे दिन कथा व्यास आचार्य नागेंद्र तिवाड़ी ने नव दुर्गा के तृतीय स्वरूप कुष्मांडा देवी की कथा का वर्णन किया। कहा कि जब भी त्रिभुवन में आसुरी शक्तियों ने अनाचार किया तो नवदुर्गा ने विभिन्न स्वरूपों में उनका अंत किया। इस मौके पर भुवन नौटियाल, अरुण मैठाणी, कैलाश नौटियाल, कौस्तुभ मणि नौटियाल, संजय नौटियाल आदि मौजूद रहे। संवाद


स्वान तल्ला में गैंडा वध का हुआ मंचन
नारायणबगड़/आदिबदरी। स्वान तल्ला गांव में चल रहे पांडव नृत्य के सातवें दिन बुधवार को गैंडा वध का मंचन किया गया।
स्वान गांव के आनंद सिंह और दर्शन सिंह ने गैंडे की प्रतीकात्मक आकृति बनाई। पूजा के बाद पांडव नृत्य की शुरुआत हुई और गैंडे को पांडव चौक पर स्थापित किया गया। दोपहर बाद गैंडा वध का मंचन शुरू हुआ। जैसे ही अर्जुन ने अपने वाण से गैंडे को मार गिराया लोगों ने पांडव देवताओं के जयकारे लगाए। इस अवसर पर किमोली, बूंगा, नैणी, कौब, बुआरकोट, भगोती, केवर, बेडूला,केशपुर आदि गांवों से लोग पहुंचे। दूसरी ओर आदिबदरी के भलसों गांव में पांडवों ने ढोल दमाऊं और श्रद्धालुओं की भीड़ के साथ जंगल प्रस्थान किया। इसके बाद वृक्ष के तने से गदा का निर्माण किया। इस अवसर पर भगवती खंडूड़ी, नवीन खंडूड़ी, नंदा नेगी, गैंणा नेगी, गिरीश जोशी , देवी प्रसाद खंडूड़ी, गोविंद नेगी, प्रदीप नेगी आदि उपस्थित थे।
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14 साल बाद नरंकार देवता की जात शुरू
गैरसैंण। ब्लाॅक के ढांगा में 14 साल बाद सात दिवसीय नरंकार देवता (शिव) की जात शुरू हुई। ढोल दमाऊं की थाप पर पुजारी राजेंद्र ने अनुष्ठान किया और पश्वाओं ने देव नृत्य किया। संचालक मंडल के मोहन लाल ओली व चंदूराम ने कहा कि सप्ताह भर तक जात चलेगी। इस दौरान नरंकार पश्वा बुद्धिबलभ, निवर्तमान प्रधान लेखराज, सुरेश सिरस्वाल, देवी लाल, डडोली निवासी दिनेश, गोबिंदी देवी, कमला आदि मौजूद थे। संवाद
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