कर्णप्रयाग तहसील के चमोला गांव के जंगलों में लगी आग से उठता धुआं।
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शुक्रवार को चमोला और सिमल्ट के साथ ही राड़खी-मज्याड़ी-सुंदरगांव के जंगलों में आग भड़क उठी। आग से चीड़ के पेड़-पौधे और घास जलकर नष्ट हो गई। सूचना पर वन विभाग के कर्मचारी चमोला और सिमल्ट में आग बुझाने के लिए मौके पर पहुंचे, लेकिन आग बेकाबू होने के कारण वह बुझा नहीं पाए।
चमोला गांव के पूर्व प्रधान हर्षवर्द्धन चमोली ने बताया कि जंगल की आग से वहां रहने वाले जंगली जानवर आबादी की ओर आ रहे हैं। इससे लोगों में खौफ बना है। आग को वन विभाग भी काबू नहीं कर पा रहा है। वहीं वन विभाग के रेंजर प्रदीप गौड़ ने कहा कि कर्मचारी जल्द ही आग पर काबू पा लेंगे।
दूसरी ओर कर्णप्रयाग ब्लॉक के राड़खी-मज्याड़ी-सुंदरगांव के जंगलों में लगी वनाग्नि से वन संपदा को नुकसान पहुंचा है। मुकेश डिमरी, महेश चंद्र, राकेश चंद्र, जगदीश सिंह आदि ने बताया कि सिमली क्षेत्र के जंगलों में आए दिन आग लग रही है। आग लगने से मवेशियों के लिए चारा-पत्ती लाने में दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने शासन-प्रशासन और वन विभाग से जंगलों की आग बुझाने और वनों को आग से बचाने के लिए समुचित प्रयास की मांग की। वहीं अलकनंदा वन प्रभाग, आटागाड़ रेंज के रेंजर नवल किशोर नेगी ने बताया कि विभागीय कर्मियों को भेजकर राड़खी-मज्याड़ी-सुंदरगांव के जंगल में लगी आग जल्द बुझा दी जाएगी।