भगवान बंशीनारायण और भविष्य बदरी के कपाट भी बृहस्पतिवार को विधिविधान के साथ शीतकाल के लिए बंद कर दिए गए। बंशीनारायण मंदिर में ग्रामीणों ने पूजा-अर्चना के बाद भगवान को भोग लगाया। दोपहर दो बजे मंदिर के कपाट बंद होने की प्रक्रिया शुरू हुई और अपराह्न 3:35 पर मंदिर के कपाट बंद कर दिए गए। इस मौके पर भरत सिंह, रतन सिंह, ग्राम प्रधान बीरा देवी और विक्रम सिंह आदि मौजूद रहे। वहीं भविष्य बदरी के पुजारी अनुमान प्रसाद ने बताया कि सभी धार्मिक अनुष्ठानों के बाद मंदिर के कपाट शीतकाल के लिए बंद कर दिए गए हैं।