आज बदरीनाथ धाम में छह माह के लिए बंद हो जाएगा वेद ऋचाओं का वाचन
संवाद न्यूज एजेंसी
बदरीनाथ। बदरीनाथ धाम के कपाट बंद होने की प्रक्रिया के दूसरे दिन बृहस्पतिवार को दोपहर दो बजे आदि केदारेश्वर और आदि गुरु शंकराचार्य मंदिर के कपाट विधि-विधान से बंद कर दिए गए। इससे पूर्व रावल (मुख्य पुजारी) अमरनाथ नंबूदरी ने भगवान आदि केदारेश्वर को अन्नकूट अर्पित किया और फिर कपाट बंद किए गए। श्रद्धालुओं ने आदि केदारेश्वर मंदिर के दर्शन भी किए। आज बदरीनाथ धाम में छह माह के लिए बंद हो जाएगा वेद ऋचाओं का वाचन।
बदरीनाथ धाम के कपाट आगामी 17 नवंबर को शीतकाल के लिए बंद कर दिए जाएंगे। बृहस्पतिवार को पंच पूजाओं के तहत दोपहर में बदरीनाथ धाम की भोग आरती के बाद आदि केदारेश्वर मंदिर में रावल (मुख्य पुजारी) अमरनाथ नंबूदरी ने भगवान आदि केदारेश्वर को पके चावलों का भोग (अन्नकूट) अर्पित किया। धर्माधिकारी राधाकृष्ण थपलियाल, वेदपाठी रविंद्र भट्ट, अमित बंदोलिया ने मंदिर में पूजा की। इसके बाद आदिकेदारेश्वर शिवलिंग को निर्वाण रूप में लाकर हिमालयी पुष्प और भस्म से ढका गया। मंदिर के पुजारी किशोर भट्ट और यमुना प्रसाद डंगवाल ने दोपहर दो बजे मंदिर के कपाट बंद कर दिए। इसके बाद सवा दो बजे आदि गुरु शंकराचार्य मंदिर के भी कपाट बंद किए गए। बीकेटीसी मीडिया प्रभारी डाॅ. हरीश गौड़ ने बताया कि पंच पूजा के तीसरे दिन शुक्रवार को वेद पुस्तकों की पूजा-अर्चना, खडग पुस्तक पूजा तथा वेद ऋचाओं का वाचन बंद हो जाएगा।